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मुंबई से गोवा का सफर हुवा दिलचस्प भारत की पहली शीशे की छत वाली ट्रेन हुई शुरू


किसी जगह की ट्रिप का मजा और भी दुगुना हो जाता है, जब सफर सुकूनभरा होता है. पिछले एक दशक से यात्रियों के सफर को सुकूनभरा बनाने के लिए सरकार काफी कदम उठा रही है. देश भर के शहरों को छोटे कस्बे और गांवों से जोड़ने का काम तेजी से हो रहा है. होली और दिवाली जैसे कई त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन और बस चलाई जाती है. इसी तरह अब मुंबई से गोवा का सफर और भी दिलचस्प हो जाएगा. 18 सितंबर से दादर और मडगांव के बीच चलने वाली जन शताब्दीट एक्सलप्रेस में एक विस्टािडोम (ग्लास-टॉप) कोच शुरू किया जाएगा.
इसमें मनोरंजन के लिए हैंगिंग एलसीडी टीवी भी है.  एसी विस्टाडोम ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्री इस विशेष कोच में रोटेटेबल कुर्सियों पर बैठेंगे. साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए हैंगिंग एलसीडी टीवी भी है. 40 सीटों वाले इस कोच की लागत 3.38 करोड़ रुपये है. इस ट्रेन में 360 डिग्री पर घूमने वाली चौड़ी सीटें हैं, जिससे सफर में बाहर के नजारों का बेहतरीन अनुभव मिलेगा.
 
कितने दिन चलेगी ट्रेन?
इस खास कोच को सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्रीय रेलवे ने अपने मुख्यालय छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल पर रिसीव किया था. जानकारी के अनुसार मॉनसून में यह ट्रेन सप्तामह में तीन दिन चलेगी और मॉनसून खत्म होने के बाद सप्ताह में पांच दिन चलेगी. जन शताब्दी एक्सप्रेस के दादर से चलने का समय सुबह 5.25 बजे है और यह उसी दिन शाम 4 बजे तक मडगांव पहुंच जाती है.

एक्जीक्यूटिव क्लास जितना किराया

विस्टाडोम कोचों को चेन्नई की द इंटीग्रल कोच फैक्ट्री  में बनाया गया है. इन कोचों का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के एक्जीयक्यूटिव क्लास जितना होगा. मूल किराए के अतिरिक्त रिजर्वेशन चार्ज, जीएसटी और कोई अन्य‍ चार्ज जोड़ा जा सकता है. उन्होंने कहा, 'इसमें कोई कंसेशन (छूट) नहीं मिलेगा और सभी यात्रियों को पूरा किराया देना होगा. इसकी न्यूनतम यात्रा दूरी 50 किलोमीटर होगी.'

पर्यटन को बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम 
विस्टाडोम कोच देश में पहली बार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किए जा रहे हैं. जिससे मुंबई या गोवा घूमने के अलावा लोग इस ट्रेन का सफर भी यात्रियों को दिलचस्प लग सके.

आगरा के दर्शनीय स्थल

 
आगरा शहर को सिकंदर लोदी ने सन् 1506 ई. में बसाया था। आगरा मुगल साम्राजय की चहेती जगह थी। आगरा 1526 से 1658 तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रहा। आज भी आगरा मुग़लकालीन इमारतों जैसे - ताज महल, लाल किला, फ़तेहपुर सीकरी आदि की वजह से एक विख्यात पर्यटन-स्थल है। बाबर (मुग़ल साम्राज्य का जनक) ने यहाँ चौकोर (आयताकार एवं वर्गाकार) बाग़ों का निर्माण कराया।

ताजमहल 
आगरे का ताजमहल, शाहजहाँ की प्रिय बेगम मुमताज महल का मकबरा, विश्व की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में से एक है। यह विश्व के नये ७ अजूबों में से एक है और आगरा की तीन विश्व सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। 
1653 में इसका निर्माण पूरा हुआ था। यह मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। पूरे श्वेत संगमर्मर में तराशा हुआ। यह मुगल शैली के चार बाग के साथ स्थित है। फारसी वास्तुकार उस्ताद ईसा खां के दिशा निर्देश में इसे यमुना नदी के किनारे पर बनवाया गया। यह सममिति का आदर्श नमूना है, जो कि कुछ दूरी से देखने पर हवा में तैरता हुआ प्रतीत होता है। इसके मुख्य द्वार पर कुरआन की आयतें खुदी हुई हैं। उसके ऊपर बाइस छोटे गुम्बद हैं, जो कि इसके निर्माण के वर्षों की संख्या बताते हैं। ताज को एक लालबलुआ पत्थर के चबूतरे पर बने श्वेत संगमर्मर के चबूतरे पर बनाया गया है। 
खुलने का समय : 6 प्रातः से 7:3० साँयः (शुक्रवार बन्द)
आगरा का किला
यह आगरा का एक प्रधान निर्माण है, जो शहर के बीचों बीच है। इसे कभी कभार लाल किला भी कहा जाता है। यह अकबर द्वारा 1565 में बनवाया गया था। बाद में शाहजहां द्वारा इस किले का पुनरोद्धार लाल बलुआ पत्थर से करवाया गया, व इसे किले से प्रासाद में बदला गया। यहां संगमर्मर और पीट्रा ड्यूरा नक्काशी का क्महीन कार्य किया गया है। इस किले की मुख्य इमारतों में मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जहाँगीर महल, खास महल, शीश महल एवं मुसम्मन बुर्ज आते हैं। इस दीवार में छोटे अंतरालों पर बुर्जियां हैं, जिनपर रक्षा छतरियां बनीं हैं। इस दीवार को ओएक 9 मीटर चौड़ी व 10 मीटर गहरी खाई घेरे हुए है।

फतेहपुर सीकरी
मुगल सम्राट अकबर ने फतेहपुर सीकरी बसाई, व अपनी राजधानी वहां स्थानांतरित की। यह आगरा से 35 कि॰मी॰ दूर है। यहां अनेकों भव्य इमारतें बनवायीं। यहां भी बुलंद दरवाजा, एक विश्व धरोहर स्थल है। बुलंद दरवाजा या 'उदात्त प्रवेश द्वार' मुगल सम्राट द्वारा बनाया गया था । 

एतमादुद्दौला का मकबरा
सम्राज्ञी नूरजहां ने एतमादुद्दौला का मकबरा बनवाया था। यह उसके पिता घियास-उद-दीन बेग़, जो जहाँगीर के दरबार में मंत्री भी थे, की याद में बनवाया गया था। मुगल काल के अन्य मकबरों से अपेक्षाकृत छोटा होने से, इसे कई बार श्रंगारदान भी कहा जाता है। यहां के बाग, पीट्रा ड्यूरा पच्चीकारी, व कई घटक ताजमहल से मिलते हुए हैं।

जामा मस्जिद
जामा मस्जिद एक विशाल मस्जिद है, जो शाहजहाँ की पुत्री, शाहजा़दी जहाँआरा बेगम़ को समर्पित है। इसका निर्माण १६४८ में हुआ था और यह अपने मीनार रहित ढाँचे तथा विशेष प्रकार के गुम्बद के लिये जानी जाती है।

चीनी का रोजा
चीनी का रोजा शाहजहाँ के मंत्री, अल्लामा अफज़ल खान शकरउल्ला शिराज़, को समर्पित है और अपने पारसी शिल्पकारी वाले चमकीले नीले रंग के गुम्बद के लिये दर्शनीय है।

मेहताब बाग
भारत का सबसे पुराना मुग़ल उद्यान, रामबाग, मुग़ल शासक बाबर ने सन् १५२८ में बनवाया था। यह उद्यान ताजम़हल से २.३४ किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है।

स्वामी बाग
स्वामीबाग समाधि हुजूर स्वामी महाराज (श्री शिव दयाल सिंह सेठ) का स्मारक/ समाधि है। यह नगर के बाहरी क्षेत्र में है, जिसे स्वामी बाग कहते हैं। वे राधास्वामी मत के संस्थापक थे। उनकी समाधि उनके अनुयाइयों के लिये पवित्र है। इसका निर्माण 1908 में आरम्भ हुआ था और कहते हैं कि यह कभी समाप्त नहीं होगा। इसमें भी श्वेत संगमर्मर का प्रयोग हुआ है। साथ ही नक्काशी व बेलबूटों के लिये रंगीन संगमर्मर व कुछ अन्य रंगीन पत्थरों का प्रयोग किया गया है। यह नक्काशी व बेल बूटे एकदम जीवंत लगते हैं। यह भारत भर में कहीं नहीं दिखते हैं। पूर्ण होने पर इस समाधि पर एक नक्काशीकृत गुम्बद शिखर के साथ एक महाद्वार होगा। इसे कभी कभार दूसरा ताज भी कहा जाता है।

सिकंदरा (अकबर का मकबरा)
आगरा किला से मात्र १३ किलोमीटर की दूरी पर, सिकंदरा में महान मुगल सम्राट अकबर का मकबरा है। यह मकबरा उसके व्यक्तित्व की पूर्णता को दर्शाता है। सुंदर वृत्तखंड के आकार में, लाल बलुआ-पत्थर से निर्मित यह विशाल मकबरा हरे भरे उद्यान के बीच स्थित है। अकबर ने स्वयं ही अपने मकबरे की रूपरेखा तैयार करवाई थी । अकबर के पुत्र जहाँगीऱ ने इस मकबरे का निर्माण कार्य १६१३ में संपन्न कराया।

मरियम मकबरा
मरियम मकबरा, अकबर की ईसाई बेग़म का मकबरा है, जो आगरा और सिकन्दरा के बीच में है।

मेहताब बाग
मेहताब बाग, यमुना के ताजमहल से विपरीत दूसरे किनारे पर है।

आवागमन 
आगरा शहर प्रमुख शहर दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, हरिद्वार, देहरादून एवं जयपुर आदि शहरों से सीधे रेल एवम् सड़क मार्ग द्वारा चौबीसों घंटे जुड़ा हुआ है। दिल्ली-मुम्बई एवम् दिल्ली-चेन्नई के लिए मध्य-पश्चिम एवम् मध्य-दक्षिण रेलवे नेटवर्क है। दिल्ली से आगरा के लिये रा.राजमार्ग-2 है जिसकी दूरी 200 कि॰मी॰ है जो कि लगभग 4 घंटे में तय की जाती है।
हवाई अड्डा एवम् प्रमुख रेलवे स्टेशन 
• खेरिया हवाई अड्डा।
• आगरा छावनी रेलवे स्टेशन
• आगरा क़िला रेलवे स्टेशन
• आगरा शहर रेलवे स्टेशन
• राजा की मण्डी रेलवे स्टेशन
• ईदगाह रेलवे स्टेशन।

मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय

आजकल की दौड़भाग भरी ज़िन्दगी में लोग रोज़ी-रोटी के चक्कर में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी सेहत पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाते, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह की स्वास्थ संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इनमें सबसे आम और भयानक रूप लेने वाली समस्या है मोटापा। यह न केवल आपकी पर्सनालिटी को खराब करता है बल्कि हार्ट संबंधी रोग, थायरॉइड, लीवर आदि जैसी बड़ी बीमारियों की भी एक बड़ी वजह है। मोटापा आपको केवल शारीरिक तौर पर हीं प्रभावित नहीं करता बल्कि आपको मानसिक रूप से भी क्षति पहुँचाता है क्यूंकि ज्यादा मोटापा बढ़ने से लोग धीरे-धीरे अपना सेल्फ कॉन्फिडेंस खो देते हैं और हर वक़्त उनके दिमाग में यह सवाल घूमते रहता है कि मोटापा कैसे कम करें?

इसलिए बेहतर होगा कि आप मोटापे को शुरूआती दौर में हीं बढ़ने से रोक दें तथा कमर और पेट कम करने के उपाय अपनाएँ। हममें से बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए बाज़ार में उपलब्ध कई तरह के महँगे सप्लीमेंट्स और मोटापा कम करने की दवा आदि का इस्तेमाल करते हैं जिसका सेवन हमारे स्वास्थ के लिए बहुत हीं नुक़सानदेह होता है।

           मोटापे के कारण

    1. अधिक मसालेदार एवं तेल युक्त भोजन का सेवन
    2. स्थिर जीवनशैली
    3. पर्याप्त नींद ना लेना
    4. आनुवांशिकता
    5. पूर्व चिकित्सा संबंधी समस्या
    6. शारीरिक परिश्रम न करना (निष्क्रिय रहना)
    7. मानसिक तनाव
    8. हार्मोन का असंतुलन
    9. मेटाबॉलिज़्म कम होना
    10. मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय
किसी भी बीमारी में आयुर्वेदिक उपचार सबसे कारगर और अच्छा माना जाता है। आयुर्वेदिक उपचार की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इससे आपको किसी भी तरह का साइड-इफ़ेक्ट नहीं होता। कई आयुर्वेदिक उपाय मसलन जीरा और मोटापा आदि काफ़ी असरदार माने जाते हैं। 

मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय –

  • अजवाइन का पानी- अजवाइन का पानी न केवल मोटापा कम करता है बल्कि हमारे  शरीर की पाचन क्रिया को भी तंदरुस्त रखता है। मोटापे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप 2 चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगो कर रात भर छोड़ दें. अगली सुबह इस पानी को छान लें और उसमें थोड़ा शहद मिलाकर पी जाएं। नियमित रूप से ऐसा करने से आपको जल्द लाभ मिलेगा।
  • दालचीनी और शहद – मोटापा कम करने के आयुर्वेदिक उपाय में दालचीनी शहद का मिश्रण बेहद कारगर है। दालचीनी एक ऐसा हर्ब है जो हमारे शरीर में ब्लड शुगर लेवल को सामान्य कर वजन कम करने में मदद करता है। यह मिश्रण तैयार करने के लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। आधे घंटे बाद इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। सुबह के समय खाली पेट इसका आधा कप पी जाएं और शेष बचे पानी को फ्रीज में रख दें। रात को बिस्तर पर जाने से पहले बचे हुए पानी को पी जाएं।
  • नींबू का रस –  मोटापा कम करने के घरेलू उपाय में नींबू सबसे आसान और बाहर हीं असरदार है। नींबू हमारे पाचन में सुधार कर, शरीर से अत्यधिक चर्बी को खत्म करता है। इस उपाय को करने के लिए एक गिलास पानी में 3 चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच शहद और आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिला लें। सुबह खाली पेट इसे पिएं, नियमित रूप  से इसका उपयोग करें जल्द लाभ मिलेगा।
  • करी पत्त्ता – करी पत्त्ता हमारे शरीर के अत्यधिक चर्बी को खत्म करने के साथ-साथ कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है। मोटापा घटाने के घरेलू उपाय के लिए आप रोज़ाना सुबह अपने भोजन में कम से कम 10 करी पत्त्ता जरूर शामिल करें।
  • ग्रीन टी – अनेक पोषक तत्वों से भरपूर ग्रीन टी मोटापा कम करने के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। रोज़ाना 3-4 कप ग्रीन टी का सेवन आपके लिए असरदार उपाय रहेगा।
  • जीरा और मोटापा – मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खों में जीरा एक बहुत हीं बेहतरीन विकल्प है। जीरा हमारे शरीर से फालतू चर्बी खत्म करने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी बढ़ाता है। जीरे का उपाय करने के लिए आप सबसे पहले एक लीटर  पानी लें और उसमेँ 2 चम्मच जीरा डालें। अब रात भर इसे ऐसे हीं छोड़ दें। अगली सुबह पानी छान कर पी जाएं। या फिर आप दही के साथ भी जीरा पाउडर का सेवन कर सकते हैं।
  • जैसा भोजन वैसे मन

    *अन्न/भोजन का मन  पर क्या असर होता है*

    इस उद्धाहरण से हम समझ सकते है -

    *" तीन महीने का प्रयोग करके देखे कि सात्विक अन्न खाने से अपने आप को एक बदलाव महसूस होने लगेगा क्योंकि  जैसा अन्न वैसा मन। "*
    सात्विक अन्न सिर्फ शाकाहारी भोजन नही बल्कि परमात्मा की याद में बनाया गया भोजन है .

    *गुस्से से अगर खाना बनाया गया है उसे सात्विक अन्न नही कहेंगे, इसलिए खाना बनाने वालों को कभी भी नाराज,  परेशान स्थिति में खाना नही बनाना चाहिए।*

    *और  कभी भी माँ बहनों को (या जो खाना बनाते है उनको) डांटना नहीं, उनसे कभी लड़ना नहीं क्योंकि वो kitchen में जाके और आपके ही खाने में गुस्से वाली Vibrations मिला के.....आपको ही एक घंटे में खिलाने वाले है...*.
    ये ध्यान में रखने वाली अत्यन्त ही महत्वपूर्ण बात है।

     किसी को डांट दो, गुस्सा कर दो और बोलो जाके खाना बनाओ.....अब....?
    खाना तो हाथ बना रहा है मन क्या कर रहा है अन्दर मन तो लगतार खिन्न है -......तो वो सारे Vibration खाने के अंदर जा रहे है..

     *भोजन तीन प्रकार का होता है-*
    1. जो हम Hotel में खाते है
    2. जो घर में माँ बनाती है और
    3. जो हम मंदिर और गुरूद्वारे में खाते है
    तीनो के Vibration अलग अलग होते हैं ।

    *(1) जो Hotel में खाना बनाते है* उनके Vibration कैसे होते है आप खाओ और हम कमायें जो ज्यादा बाहर खाता है उसकी वृति धन कमाने के अलावा कुछ और सोच नहीं सकती है क्यूंकि वो खाना ही वही खा रहा है...

     *(2) घर में जो माँ खाना बनाती है*
    वो बड़े प्यार से खाना बनाती है...
    घर में आजकल जो धन ज्यादा आ गया है इसलिए घर में Cook (नौकर) रख लिए है खाना बनाने के लिए और वो जो खाना बना रहे है वो भी.. इसी सोच से कि आप खाओ हम कमाए....

     एक बच्चा अपनी माँ को बोले कि..एक रोटी और खानी है  तो माँ का चेहरा ही खिल जाता है।कितनी प्यार से वो एक और रोटी बनाएगी। कि मेरे बच्चे ने रोटी तो और मांगी वो उस रोटी में बहुत ज्यादा प्यार भर देती है...
    अगर आप अपने Cook (नौकर) को बोलो एक रोटी और खानी है.... तो..? वो सोचेगा ...रोज 2 रोटी खाते है, आज एक और चाहिए आज ज्यादा भूख लगी है अब मेरे लिए एक कम पडेगी या ..आटा भी ख़त्म हो गया अब और आटा गुंथना पड़ेगा एक रोटी के लिए..मुसीबत...!!!

    *ऐसी रोटी नही खानी है..ऐसी रोटी खाने से..ना खाना ही भला....*

    *(3) जो मंदिर और गुरूद्वारे में*
    खाना बनता है प्रसाद बनता है वो किस भावना से बनता है...
    वो परमात्मा को याद करके खाना बनाया जाता है क्यों न हम अपने घर में परमात्मा की याद में प्रसाद बनाना शुरू कर दें.

    *करना क्या है*-
    घर, रसोई साफ़, मन शांत, रसोई में अच्छे गीत (भजन-कीर्तन) चलाये और परमात्मा को याद करते हुए खाना बनाये ।

     *घर में जो Problem है उसके लिए जो solution है उसके बारे में परमात्मा को याद करते हुए खाना बनाये.*
     परमात्मा को कहे मेरे बच्चे के कल exam है,  इस खाने में बहुत ताकत भर दो.!  शांति भर दो.! ताकि मेरे बच्चे का मन एकदम शांत हो, ताकि उसकी सारी टेंशन ख़तम हो जाये.
    हे परमात्मा, मेरे पति को Business में बहुत टेंशन है और वो बहुत गुस्सा करते हैं, इस खाने में ऐसी शक्ति भरो, कि उनका मन शांत हो जाये...
    *जैसा अन्न वैसा मन..*
    *जादू है खाने में। असर है पकाने में।*
    ओम शांति

    Nice Lines

    *अमीरों के चेहरे पे कभी,*
    *मुस्कान नहीं होती ...*

    *गरीब के चेहरे पे कभी,*
    *थकान नहीं होती ...*

    *सब कुछ खरीद सकती है,*
    *दौलत इस दुनिया में ...*

    *पर शुक्र है मुस्कुराहट,*
    *किसी की गुलाम नहीं होती ...*😊
               

    Nice Lines

    *किसी  ने कहा    ---जब हर कण कण मे भगवान है तो तुम मंदिर क्यूँ जाते हैं।*

    *बहुत सुंदर जवाब*

    *हवा तो धुप में भी चलती है पर आनंद*
    *छाँव मे बैठ कर मिलता है*
    *वैसे ही भगवान सब तरफ है पर*
                       *आनंद मंदिर मे ही* *आता है।।*

    Nice Lines

    *Positive attitude*

    एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था।
    वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।

    *रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...*

    *इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल  जाते,*
    पर...

    केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।

    *एक दिन मैंने देखा कि* ...

    उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा....

    *"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"*

    इस पर वो बच्चा बोला...
    *"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?*
    *इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।*

    *"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।*

    *आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...*

    *अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न कोई कमी जरुर रहेगी....*

    वो बच्चा माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु ऐसा न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।

    *हम कितना रोते हैं?*
    कभी अपने *साँवले रंग* के लिए, कभी *छोटे क़द* के लिए,
    कभी पड़ौसी की *बडी कार,*
    कभी पड़ोसन के *गले का हार,* कभी अपने *कम मार्क्स,*
    कभी *अंग्रेज़ी,*
    कभी *पर्सनालिटी,*
    कभी *नौकरी की मार* तो
    कभी *धंदे में मार*...
    हमें इससे बाहर आना पड़ता है....
    *ये जीवन है... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।*
     *चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी डिप्रेशन में नहीं आती,*
    *वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है,*
    *मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं।*
    *तुलना से बचें और खुश रहें ।*
    *ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़..!!!*
    *अपनी अपनी हैं मंजिलें, अपनी अपनी दौड़..!!!*

           
    *"परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती,*
    *समस्या इस लिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से लड़ना नहीं आता।"*

     🙏 *"सदा मुस्कुराते रहिये"*🙏

    Sab kuch

    मूलाधार चक्र हीलिंग।

      https://youtu.be/APq3mCgb3fM?si=D1nkuyqimWfZXSyp ये वीडियो जरूर देखें, मूलाधार चक्र हीलिंग का है ,रात को सोने से पहले जरूर देखें बहुत पावर...