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 #महानवार्णमंत्र!! 

इस मंत्र का नित्य 3 बार उच्चारण ही भगवती को प्रसन्न करने के लिए प्रर्याप्त है। यह मंत्र भगवती की कृपा प्राप्त करने शत्रुनाश और सभी कार्य में सफलता के लिए रुद्राक्ष या हकीक माला से 1 माला नित्य करें। 


महानवार्ण मंत्र :- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महादुर्गे नवाक्षरी नवदुर्गे नवात्मिके नवचण्डी महामाये महामोहे महायोगनिद्रे जये मधुकैटभ विद्राविणी महिषासुर मर्दिनी धूम्रलोचन संहन्त्रि चण्डमुण्ड विनाशिनी रक्तबीजान्तके निशुम्भध्वंसिनी शुम्भदर्पघ्नि देवि अष्टादश बाहुके कपाल- खट्वांग शूल खड्ग खेटक धारिणी छिन्न मस्तक धारिणी रूधिर मांस भोजिनी समस्त भूत प्रेतादि योग ध्वंसिनी ब्रह्मेन्द्रादि स्तुते देवि मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् नाशय नाशय ह्रीं फट् ह्रूं फट् ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।। ~~~~~`````~~~~`````~~~~``~~~~~


Pi network mining



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विश्वास

 8 साल का एक बच्चा 1 रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर पूछने लगा,

--क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे?


दुकानदार ने यह बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया।


बच्चा पास की दुकान में जाकर 1 रूपये का सिक्का लेकर चुपचाप खड़ा रहा!


-- ए लड़के.. 1 रूपये में तुम क्या चाहते हो?

-- मुझे ईश्वर चाहिए। आपकी दुकान में है?


दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया।


लेकिन, उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी, ऐसा करते करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने के बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पहुंचा। उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा,


-- तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो? क्या करोगे ईश्वर लेकर?


पहली बार एक दुकानदार के मुंह से यह प्रश्न सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणें लहराईं ৷ लगता है इसी दुकान पर ही ईश्वर मिलेंगे ! 

 बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया,


----इस दुनिया में मां के अलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी मां दिनभर काम करके मेरे लिए खाना लाती है। मेरी मां अब अस्पताल में हैं। अगर मेरी मां मर गई तो मुझे कौन खिलाएगा ? डाक्टर ने कहा है कि अब सिर्फ ईश्वर ही तुम्हारी मां को बचा सकते हैं। क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे?


-- हां, मिलेंगे...! कितने पैसे हैं तुम्हारे पास?


-- सिर्फ एक रूपए।


-- कोई दिक्कत नहीं है। एक रूपए में ही ईश्वर मिल सकते हैं।


दुकानदार बच्चे के हाथ से एक रूपए लेकर उसने पाया कि एक रूपए में एक गिलास पानी के अलावा बेचने के लिए और कुछ भी नहीं है। इसलिए उस बच्चे को फिल्टर से एक गिलास पानी भरकर दिया और कहा, यह पानी पिलाने से ही तुम्हारी मां ठीक हो जाएगी।


अगले दिन कुछ मेडिकल स्पेशलिस्ट उस अस्पताल में गए। बच्चे की मां का आप्रेशन हुआ और बहुत जल्दी ही वह स्वस्थ हो उठीं।


डिस्चार्ज के कागज़ पर अस्पताल का बिल देखकर उस महिला के होश उड़ गए। डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन देकर कहा, "टेंशन की कोई बात नहीं है। एक वृद्ध सज्जन ने आपके सारे बिल चुका दिए हैं। साथ में एक चिट्ठी भी दी है"। 


महिला चिट्ठी खोलकर पढ़ने लगी, उसमें लिखा था-

"मुझे धन्यवाद देने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको तो स्वयं ईश्वर ने ही बचाया है ...  मैं तो सिर्फ एक ज़रिया हूं। यदि आप धन्यवाद देना ही चाहती हैं तो अपने अबोध बच्चे को दीजिए जो सिर्फ एक रूपए लेकर नासमझों की तरह ईश्वर को ढूंढने निकल पड़ा। उसके मन में यह दृढ़ विश्वास था कि एकमात्र ईश्वर ही आपको बचा सकते है। विश्वास इसी को ही कहते हैं। ईश्वर को ढूंढने के लिए करोड़ों रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं होती, यदि मन में अटूट विश्वास हो तो वे एक रूपए में भी मिल सकते हैं।"

 अगर पोस्ट प्रेरणादायक लगी हो तो शेयर कर दीजिए  और

कमेंट बॉक्स में अपने विचार अवश्य व्यक्त करें। 

पाशुपतास्त्र स्तोत्रम्

 


मात्र एक बार श्रद्धा से पढने से समस्त बाधाएँ दूर होती ही हैं। 


इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है, सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातों को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त कर सकता है। इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवन करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है, इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशों की शांति हो जाती है।

।जय सद्गुरुदेव, जय महांकाल।


।।पाशुपतास्त्र स्तोत्रम।।

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इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है । सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त के सकता है । इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है । इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है । 


स्तोत्रम:-


ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुल बलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे ।

ॐ कृष्णपिंग्डलाय फट । हूंकारास्त्राय फट । वज्र हस्ताय फट । शक्तये फट । दण्डाय फट । यमाय फट । खडगाय फट । नैऋताय फट । वरुणाय फट । वज्राय फट । पाशाय फट । ध्वजाय फट । अंकुशाय फट । गदायै फट । कुबेराय फट । त्रिशूलाय फट । मुदगराय फट । चक्राय फट । पद्माय फट । नागास्त्राय फट । ईशानाय फट । खेटकास्त्राय फट । मुण्डाय फट । मुण्डास्त्राय फट । काड्कालास्त्राय फट । पिच्छिकास्त्राय फट । क्षुरिकास्त्राय फट । ब्रह्मास्त्राय फट । शक्त्यस्त्राय फट । गणास्त्राय फट । सिध्दास्त्राय फट । पिलिपिच्छास्त्राय फट । गंधर्वास्त्राय फट । पूर्वास्त्रायै फट । दक्षिणास्त्राय फट । वामास्त्राय फट । पश्चिमास्त्राय फट । मंत्रास्त्राय फट । शाकिन्यास्त्राय फट । योगिन्यस्त्राय फट । दण्डास्त्राय फट । महादण्डास्त्राय फट । नमोअस्त्राय फट । शिवास्त्राय फट । ईशानास्त्राय फट । पुरुषास्त्राय फट । अघोरास्त्राय फट । सद्योजातास्त्राय फट । हृदयास्त्राय फट । महास्त्राय फट । गरुडास्त्राय फट । राक्षसास्त्राय फट । दानवास्त्राय फट । क्षौ नरसिन्हास्त्राय फट । त्वष्ट्रास्त्राय फट । सर्वास्त्राय फट । नः फट । वः फट । पः फट । फः फट । मः फट । श्रीः फट । पेः फट । भूः फट । भुवः फट । स्वः फट । महः फट । जनः फट । तपः फट । सत्यं फट । सर्वलोक फट । सर्वपाताल फट । सर्वतत्व फट । सर्वप्राण फट । सर्वनाड़ी फट । सर्वकारण फट । सर्वदेव फट । ह्रीं फट । श्रीं फट । डूं फट । स्त्रुं फट । स्वां फट । लां फट । वैराग्याय फट । मायास्त्राय फट । कामास्त्राय फट । क्षेत्रपालास्त्राय फट । हुंकरास्त्राय फट । भास्करास्त्राय फट । चंद्रास्त्राय फट । विघ्नेश्वरास्त्राय फट । गौः गां फट । स्त्रों स्त्रौं फट । हौं हों फट । भ्रामय भ्रामय फट । संतापय संतापय फट । छादय छादय फट । उन्मूलय उन्मूलय फट । त्रासय त्रासय फट । संजीवय संजीवय फट । विद्रावय विद्रावय फट । सर्वदुरितं नाशय नाशय फट ।

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#स्तोत्रम् ●


ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुलबलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे।


ॐ कृष्णपिंग्डलाय फट।

हूंकारास्त्राय फट।

वज्र हस्ताय फट।

शक्तये फट।

दण्डाय फट।

यमाय फट।

खडगाय फट।

नैऋताय फट।

वरुणाय फट।

वज्राय फट।

पाशाय फट।

ध्वजाय फट।

अंकुशाय फट।

गदायै फट।

कुबेराय फट।

त्रिशूलाय फट।

मुदगराय फट।

चक्राय फट।

पद्माय फट।

नागास्त्राय फट।

ईशानाय फट।

खेटकास्त्राय फट।

मुण्डाय फट।

मुण्डास्त्राय फट।

काड्कालास्त्राय फट।

पिच्छिकास्त्राय फट।

क्षुरिकास्त्राय फट।

ब्रह्मास्त्राय फट।

शक्त्यस्त्राय फट।

गणास्त्राय फट।

सिध्दास्त्राय फट।

पिलिपिच्छास्त्राय फट।

गंधर्वास्त्राय फट।

पूर्वास्त्रायै फट।

दक्षिणास्त्राय फट।

वामास्त्राय फट।

पश्चिमास्त्राय फट।

मंत्रास्त्राय फट।

शाकिन्यास्त्राय फट।

योगिन्यस्त्राय फट।

दण्डास्त्राय फट।

महादण्डास्त्राय फट।

नमोअस्त्राय फट।

शिवास्त्राय फट।

ईशानास्त्राय फट।

पुरुषास्त्राय फट।

अघोरास्त्राय फट।

सद्योजातास्त्राय फट।

हृदयास्त्राय फट।

महास्त्राय फट।

गरुडास्त्राय फट।

राक्षसास्त्राय फट।

दानवास्त्राय फट।

क्षौ नरसिन्हास्त्राय फट।

त्वष्ट्रास्त्राय फट।

सर्वास्त्राय फट।

नः फट।

वः फट।

पः फट।

फः फट।

मः फट।

श्रीः फट।

पेः फट।

भूः फट।

भुवः फट।

स्वः फट।

महः फट।

जनः फट।

तपः फट।

सत्यं फट।

सर्वलोक फट।

सर्वपाताल फट।

सर्वतत्व फट।

सर्वप्राण फट।

सर्वनाड़ी फट।

सर्वकारण फट।

सर्वदेव फट।

ह्रीं फट।

श्रीं फट।

डूं फट।

स्त्रुं फट।

स्वां फट।

लां फट।

वैराग्याय फट।

मायास्त्राय फट।

कामास्त्राय फट।

क्षेत्रपालास्त्राय फट।

हुंकरास्त्राय फट।

भास्करास्त्राय फट।

चंद्रास्त्राय फट।

विघ्नेश्वरास्त्राय फट।

गौः गां फट।

स्त्रों स्त्रौं फट।

हौं हों फट।

भ्रामय भ्रामय फट।

संतापय संतापय फट।

छादय छादय फट।

उन्मूलय उन्मूलय फट।

त्रासय त्रासय फट।

संजीवय संजीवय फट।

विद्रावय विद्रावय फट।

सर्वदुरितं नाशय नाशय फट।

||करालं महाँकाल कालं कृपालं||

एक्सीडेंट क्यों होती है?

 


संसार में जन्म लेने के लिए माँ के गर्भ में *9 महीने* रुक सकते है।

चलने के लिए *2 वर्ष*,

स्कूल में प्रवेश के लिए *3 वर्ष,*

मतदान के लिए *18 वर्ष,*

नौकरी के लिए *22 वर्ष ,*

शादी के लिये *25 -30 वर्ष*,

इस तरह अनेक मौकों के लिए हम *इंतजार* करते है। लेकिन,,,,,,

गाड़ी *ओवरटेक* करते समय *30 सेकंड* भी नही रुकते,,,,।।

बाद में *एक्सीडेंट* होने के बाद *जिन्दा* रहे तो एक्सीडेंट निपटाने के लिए *कई घण्टे*, हॉस्पिटल में *कई दिन, महीने या साल* निकाल देते है।

*कुछ सेकंड* की गड़बड़ी कितना *भयंकर परिणाम* ला सकती है। जाने वाले चलें जाते हैं , पीछे वालों का क्या! इस पर विचार किया, कभी किया नहीं ।

फिर हर बार की तरह, सिर्फ *नियति* को ही दोष ।।

इसलिये *सही रफ्तार*, *सही दिशा* में व वाहन *संभल* कर चलायें *सुरक्षित* पहुंचे।

*आपका अपना मासूम परिवार आपका घर पर इंतजार कर रहा है।*


आप से निवेदन है इसे आगे फैलाने में मदद करें।क्या पता 1% लोग भी मेरे विचार से सहमत हो तो.......................................

बागेश्वर धाम की सच्चाई ?

 इस तस्वीर को गौर से देखिये

यह फोटो आज से चार माह पुरानी है !

जब बागेश्वर महाराज बुन्देलखण्ड पन्ना जिले के 90 प्रतिशत आदिवासी वनवासी इलाके कलदा पहाड़ पर श्रीराम कथा करने गए थे।


यह वो इलाका है जिसे धर्मान्तरण कराने वाली मिशनरियों और सनातन विरोधी अन्य संस्थाओं ने अपना चरागाह बनाकर रखा है। 

महराज ने यहां खुद टेंट पंडाल लगाया आदिवासियों को मंच पर बुलाकर उनसे आरती कराई,

अनेक लोगों की सनातन में धर्म बापसी कराई।


बस उसी दिन से जमीन पर बैठा यह 27 साल का लड़का देश की अनेक संस्थओं का दुश्मन बन गया।


इसके बाद दमोह में ईसाई बन चुके 300 परिवारों की घर बापीसी कराई तो इन विधर्मियो के सीने में आग लग गई।


यह तो होना ही था


लेकिन अब यह लड़ाई सिर्फ बागेश्वर महाराज जी की नही है।यह हर हिंदू की लड़ाई है।


मुझे नही पता बागेश्वर महाराज चमत्कार करते हैं !

या नहीं !

लेकिन मुझे पता है कि -

आज बागेश्वर महाराज जैसे संतों की सनातन को सख्त जरूरत है।


मैं इस लड़ाई में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज जी के साथ हूं।


मेरा देश चादर और फादर का नही! 


सनातन और साधु संतो का है।


जय श्री हिंदू राष्ट्र।🚩🚩


#WesupportBageshwardham🙏🙏


#बागेश्वर_धाम #हम_धीरेंद्र_शास्त्री_जी_के_साथ_हैं #arnabarmy #टूलकिट #बागेश्वर_धाम_सरकर

रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी।

 


1 से 14 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी | रुद्राक्ष धारण करें और पाए सभी कष्टों से निवारण |


रुद्राक्ष एक फल के अंदर निकलने वाला बीज है जिसका पेड़ पहाड़ी क्षत्रों में पाया जाता है | धार्मिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव ने कठोर तपस्या के बाद अपने नेत्र खोले तो  उनकी आँखों से कुछ आंसू पृथ्वी पर आ गिरे जिनसे रुद्राक्ष के पेड़ की उत्त्पत्ति हुई |


रुद्राक्ष = रूद्र + अक्ष , इन दो शब्दों से मिलकर बना यह शब्द ‘ रुद्राक्ष ‘ भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है |  जिसमें रूद्र-  भगवान शिव का ही नाम है और अक्ष का अर्थ आंसू से है | इस प्रकार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओ से हुई | रुद्राक्ष को धारण करने वाले  व्यक्ति भगवान शिव को प्रिय होते है |


रुद्राक्ष की उत्पत्ति :- 

रुद्राक्ष का पेड़ भारत में हिमालय क्षेत्र में और असम व उत्तरांचल के जंगलो में पाए जाते है इसके साथ -साथ नेपाल , मलेशिया और इंडोनेशिया में काफी मात्रा में पायें जाते है |   नेपाल और इंडोनेशिया से रुद्राक्ष सबसे अधिक मात्रा मे निर्यात भारत में होता है |


रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते है :- 

रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते है यह सुनिश्चित कर पाना कठिन है |  विशेषज्ञों के अनुसार रुद्राक्ष 14 मुखी , 21 मुखी और शिव महापुराण अनुसार रुद्राक्ष 38 मुखी तक होते है  | किन्तु रुद्राक्ष 21 मुखी तक ही देखने को मिलते है | इनमें से एक मुखी और 14 मुखी रुद्राक्ष बहुत ही दुर्लभ होते है और बहुत ही कम मात्रा में होते है | पांच मुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक होते है और आसानी से उपलब्ध हो जाते है |


रुद्राक्ष धारण करने का महत्व : –

धार्मिक महत्व : – रुद्राक्ष भगवान शिव को बहुत प्रिय होते है अतः इन्हें धारण करने वाले मनुष्य पर हमेशा भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है | रुद्राक्ष धारण करने से सभी प्रकार की नकारात्मक उर्जा दूर रहती है | भय आदि से मुक्ति मिलती है | रुद्राक्ष के मुख के आधार पर इसके धार्मिक महत्व को और स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है |


वैज्ञानिक महत्व : – रुद्राक्ष को शरीर पर धारण करने के धार्मिक महत्व के साथ -साथ इसके वैज्ञानिक कारण भी है | रुद्राक्ष के रोम छिद्रों से एक अलग प्रकार का स्पदंन होता है जो मानव ह्रदय पर सकारात्मक प्रभाव दिखाता है | रुद्राक्ष के धारण करने से ह्रदय रक्त चाप सामान्य रहता है | इसके अतिरिक्त मानव मस्तिस्क पर भी रुद्राक्ष से निकलने वाली विशेष तरंगे सकारात्मक प्रभाव दिखाती है | रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति तनाव ,चिंता और अवसाद आदि से मुक्त रहता है |


रुद्राक्ष धारण करने की विधि :-


रुद्राक्ष को अधिकतर व्यक्ति इसे बिना किसी पूजन के धारण कर लेते है इस प्रकार रुद्राक्ष धारण करने से उन्हें सिर्फ वैज्ञानिक लाभ प्राप्त होते है | रुद्राक्ष को धारण करने की एक विधि होती है आप उसके अनुसार ही रुद्राक्ष धारण करें |


रुद्राक्ष के धारण करने से पहले आप इसे 7 दिन तक सरसों के तेल में डुबो कर रखे | रुद्राक्ष को आप  श्रावन मास में किसी भी सोमवार के दिन या आप पूरे श्रावन मास में किसी भी दिन धारण कर सकते है  , शिवरात्रि या किसी भी पूर्णिमा के दिन धारण कर सकते है |


इन पवित्र दिनों में आप  रुद्राक्ष  को  पंचामृत (दूध , शहद , दही , तुलसी  और गंगाजल) से स्नान कराने के पश्चात् गंगाजल से स्नान कराये और   हवन की भभूती से तिलक करने के पश्चात् “ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात ” मंत्र का जाप करते हुए गले में  धारण करना चाहिए  | यदि हवन की भभूति उपलब्ध नहीं हो तो कुमकुम से तिलक कर सकते है |


इसके अतिरिक्त आप जब भी शिव मंदिर जाते है रुद्राक्ष  को शिवलिंग से स्पर्श कराये और प्रत्येक मास में कम से कम  2 सोमवार को इसे पंचामृत और गंगाजल से स्नान अवश्य कराये | और प्रतिदिन पूजा करते समय दूप -दीप दिखाए |


रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को क्या सावधानियां रखनी चाहिए :-

रुद्राक्ष को साक्षात् भगवान शिव का ही रूद्र रूप माना जाता है अतः इसे धारण करने वाले व्यक्ति को सैदव पवित्र रहना चाहिए | मांस -मदिरा से बिलकुल दूर रहें | रुद्राक्ष पहनकर किसी भी शवयात्रा या शमशान में न जाये | घर पर कभी  श्यावड या सूतक के दिनों का आभाष होने पर इसे निकालकर पूजा स्थल पर रख दे और बाद में गंगाजल से पवित्र करने के पश्चात् ही धारण करें |


रुद्राक्ष के प्रकार और रुद्राक्ष धारण करने के लाभ :-

आज के समय में आपको एक से 14 मुखी तक ही रुद्राक्ष मिल पाएंगे | जिनकों धारण करने के लाभ इस प्रकार है : –


एक मुखी रुद्राक्ष 


एक मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को साक्षात् भगवान शिव का ही रूप माना गया है | इसकी उत्पत्ति बहुत कम होती है | अतः इसे प्राप्त कर पाना बहुत ही दुर्लभ है | एक मुखी रुद्राक्ष सूर्य जनित दोषों को समाप्त करता है | इसे धारण करने से नेत्र संबधी रोग , ह्रदय रोग , पेट रोग और हड्डी के रोगों से मुक्ति मिलती है | इस धारण करने से सांसारिक , मानसिक ,शारीरिक और देवीय कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ -साथ आत्म मनोबल में वृद्धि होती है | राशि अनुसार कर्क , सिंह और मेष राशि के व्यक्ति इसे धारण करें तो उनके लिए यह अधिक उत्तम होता है |  असली एक मुखी रुद्राक्ष को प्राप्त कर पाना बहुत ही मुश्किल है | अतः किसी विशेषज्ञ द्वारा असली एक मुखी रुद्राक्ष की पहचान करने के पश्चात ही इसे धारण करना चाहिए | ऑनलाइन और ऊँची कीमत पर मिलने वाले रुदाक्ष को उनकी कीमत के आधार पर उनके असली व नकली होने की पहचान कदापि न करें |


दो मुखी रुद्राक्ष/ 2 Mukhi Rudraksha :-

2 mukhi rudraksh ke laabh 


दो मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को शिव शक्ति का स्वरुप माना जाता है | मष्तिष्क , ह्रदय , फेफड़ों  और नेत्र रोगों में इस रुद्राक्ष को धारण करने से विशेष लाभ  प्राप्त होता है | इसे धारण करने से भगवान अर्धनारीश्वर प्रसन्न होते है | इसे धारण/dharan करने से पति – पत्नी के बीच प्रेम भाव बढ़ता है | गो हत्या के पाप का दोष इस रुद्राक्ष के धारण करने और इसकी नित्य पूजा करने से समाप्त हो जाता है | युवक- युवतियों के विवाह में यदि  विलम्ब हो रहा हो तो  इस रुद्राक्ष के धारण करने से शीघ्र शुभ परिणाम मिलते है | कर्क राशी वालो के लिए यह रुद्राक्ष अत्यधिक लाभकारी है |


तीन मुखी रुद्राक्ष /3 Mukhi Rudraksha:- 

3 mukhi rudraksh ke laabh 


तीन मुखी रुद्राक्ष Rudraksha अग्नि देव का स्वरुप माना गया है इस रुद्राक्ष को धारण करने से स्त्री हत्या जैसे पापों से मुक्ति मिलती है | नीरस बन चुके जीवन में फिर से  नई  उमंग जगाने के साथ -साथ  तीन मुखी रुद्राक्ष पेट से संबधित होने वाली सभी बिमारियों के लिए भी बहुत लाभदायक है


चार मुखी रुद्राक्ष /4 Mukhi Rudraksha:- 

4 mukhi rudraksh ke laabh 


चार मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को धारण करने से संतान प्राप्ति होते है | यह रुद्राक्ष बुद्धि को तीव्र करता है शरीर के रोगों को भी दूर करने में भी सहायक सिद्ध होता है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से वाणी में मिठास और दूसरों को अपना बनाने की कला विकसित होती है | वेदों और धार्मिक ग्रंथो के अध्यन में भी सफलता प्राप्त होती है | शिवमहापुराण  के अनुसार इस रुद्राक्ष को लम्बे समय तक धारण करने से और भगवान शिव के बीज मंत्रो का पाठ करने से जीव हत्या के पाप से भी मुक्ति मिल सकती है |


 

पांच मुखी रुद्राक्ष/5 Mukhi Rudraksha :- 

5 mukhi rudraksh ke laabh 


पंच मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को सर्वगुण संपन्न कहा गया है | यह भगवान शिव का सबसे प्रिय रुद्राक्ष है   इसे सभी रुद्राक्षो में सबसे अधिक शुभ और पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है |इसका अधिपति गृह बृहस्पति है  इसलिए बृहस्पति गृह के प्रतिकूल होने के कारण आने वाली समस्याएं  इस रुद्राक्ष के धारण करने से स्वतः दूर हो जाती है | पांच मुखी रुद्राक्ष के धारण करने से जीवन में सुख -शांति और प्रसद्धि प्राप्त होती है | पंचमुखी रुद्राक्ष कालाग्नि के नाम से विख्यात है पंचमुखी रुद्राक्ष में पंचदेवों का निवास माना गया है |


पंचमुखी रुद्राक्ष के धारण करने से रक्तचाप और मधुमेह सामान्य रहता है | पेट के रोगों में भी यह रुद्राक्ष लाभ पहुंचाता है | मन में आने वाले गलत विचारो को नियंत्रित कर मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है | राशि के अनुसार मेष , कर्क , सिंह , वृश्चिक , धनु और मीन राशी वालों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है |


छह मुखी रुद्राक्ष/ 6 Mukhi Rudraksha :-

6 mukhi rudraksh ke laabh 


छह मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को भगवान शिव पुत्र कार्तिकेय का स्वरुप माना गया है | शिव महापुराण अनुसार इस रुद्राक्ष को विधिवत धारण करने और नियमित पूजा करने से ब्रह्म हत्या के पाप से सभी मुक्ति मिल सकती है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से बुद्धि का विकास होने के साथ -साथ  नेतृत्व करने की क्षमता भी विकसित होती है |  शरीर में आने वाले रोगों को भी दूर कर स्वस्थ जीवन प्रदान करता है | इस रुद्राक्ष को विधिवत पूजन कर धारण करने से भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप जीवन में आने वाले सभी कष्ट स्वतः ही दूर होने लगते है | इस रुद्राक्ष के प्रधान देव शुक्र देव को माना गया है |


सात मुखी रुद्राक्ष /7 Mukhi Rudraksha :- 

7 mukhi rudraksh ke laabh 


सात मुखी रुद्राक्ष सप्त ऋषियों का प्रतिनिधित्त्व करता है | माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति पर हमेशा बनी रहती है | घर में धन की वृद्धि होती है | सात मुखी रुद्राक्ष Rudraksha पर शनिदेव का प्रभाव माना गया है | इसलिए इसको धारण करने पर शनिदेव प्रसन्न होकर अपनी विशेष कृपा बनाये रखते है | सप्तमुखी होने के कारण यह रुद्राक्ष शरीर में सप्धातुओं की रक्षा करता है और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है | जो व्यक्ति मानसिक बीमारी या जोड़ो के दर्द से परेशान है उन्हें इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए |


आठ मुखी रुद्राक्ष / 8 Mukhi Rudraksha : – 

8 mukhi rudraksh ke labh


आठ मुखी रुद्राक्ष भैरो देव जी का स्वरुप माना गया  है | और इसके प्रधान देव श्री गणेश जी है | इसे धारण करने से अष्टदेवियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है | इसे धारण करने से इन्द्रियों को नियंत्रित करने की शक्ति जागृत होती है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से बुद्धि , ज्ञान, धन और यश की प्राप्ति होती है | इस रुद्राक्ष के धारण करने से और विधिवत पूजन करने से  पर स्त्री भोग के पाप से मुक्ति मिलती है | यह रुद्राक्ष जीवन की हर मुश्किलों को दूर कर रिद्धि -सिद्धि प्रदान करता है |आठ मुखी रुद्राक्ष राहू गृह से सम्बंधित है | अगर आपकी कुंडली में राहू दोष होने के कारण कठिनाइयाँ आ रही है तो इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करें |


नौ मुखी रुद्राक्ष /9 Mukhi Rudraksha :- 

9 mukhi rudraksh ke labh 


नौ मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को माँ भगवती की नौ शक्तियों  का प्रतीक माना गया है | इसके साथ -साथ कपिलमुनि और भैरोदेव की भी कृपा इस रुद्राक्ष पर है | इस रुद्राक्ष Rudraksha को धारण करने से शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है |   इस रुद्राक्ष का प्रधान गृह केतु है अतः यह  केतु गृह के कारण जीवन में आने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम करता है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से कीर्ति , मान -सम्मान में वृद्धि होती है और मन को शांति मिलती है | माँ नवदुर्गा का स्वरुप होने के कारण यह रक्षा कवच का कार्य करता है | जो माँ दुर्गा की पूजा करते है उन्हें इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिये |


दस मुखी रुद्राक्ष/ 10 Mukhi Rudraksha :- 

10 mukhi rudraksh ke labh


इस रुद्राक्ष Rudraksha को भगवान विष्णु का स्वरुप माना गया है | इस रुद्राक्ष के धारण करने से उपरी बाधाएं , भूत-प्रेत  जैसी नकारात्मक शक्तियां शरीर से दूर रहती है | तंत्र – मंत्र और साधनाएं करने वाले जातक को इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए | पेट के रोगों में , गठिया ,दमा और नेत्र रोगों में यह रुद्राक्ष विशेष लाभ पहुंचाता है |


ग्यारह मुखी रुद्राक्ष/ 11 Mukhi Rudraksha : –

11 mukhi rudraksh ke labh


ग्यारह मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को भगवान शिव के 11 रुद्रों का प्रतीक माना गया है | भगवान शिव के 11वे अवतार हनुमान जी की विशेष कृपा इस रुद्राक्ष को धारण करने पर बनी रहती है | व्यापार में उन्नत्ति प्राप्त करने के लिए इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण/dharan करना चाहिए | इस रुद्राक्ष के धारण करने पर अकाल मृत्यु का भय नही रहता | धार्मिक अनुष्ठान , यज्ञ -हवन आदि धार्मिक कार्यों में यह रुद्राक्ष सफलता प्रदान करता है |


बारह मुखी रुद्राक्ष/ 12 Mukhi Rudraksha : – 

12 mukhi rudraksh ke labh


बारह मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को भगवान महाविष्णु का स्वरुप माना गया है | इस रुद्राक्ष को धारण करने से असाध्य से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते है | इस रुद्राक्ष के धारण/Dharan करने से ह्रदय , मष्तिस्क और उदर रोगों में लाभ प्राप्त होता है | गोवध और रत्नों की चोरी करने जैसे महापापों में इस रुद्राक्ष द्वारा मुक्ति प्राप्त होती है | यह रुद्राक्ष सभी प्रकार की दुर्घटनाओ से आपको बचाता है |


तेरह  मुखी रुद्राक्ष/ 13 Mukhi Rudraksha : –

13 rudraksh ke labh


तेरह मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को स्वर्ग के राजा इन्द्रदेव का स्वरुप माना गया है | इसके साथ -साथ इसे धारण करने पर कामदेव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है | इस धारण करने से वशीकरण और किसी को अपनी तरफ आकर्षित करने का गुण भी आता है | जिनके जीवन में प्रेम और ग्रहस्थ सुख की कमी हो उन्हें इस रुद्राक्ष Rudraksha को अवश्य धारण करना चाहिए | सभी ग्रहों के प्रभाव को अपने अनुकूल बनाने के लिए भी इस रुद्राक्ष को धारण/Dharan किया जा सकता है |


चौदह मुखी रुद्राक्ष/ 14 Mukhi Rudraksha : – 

14 mukhi rudraksh


चौदह मुखी रुद्राक्ष Rudraksha को साक्षात् हनुमान जी का स्वरुप माना गया है इसलिए हनुमान जी की उपासना करने वाले जातक को इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए | भूत – प्रेत और उपरी बाधाएं इस रुद्राक्ष के धारण करने स्वतः अपना स्थान छोड़ देती है | यह रुद्राक्ष व्यक्ति को उर्जावान और निरोगी बनाता है | इस रुद्राक्ष Rudraksha के धारण/Dharan करने से साधना में सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है |

Sab kuch

मूलाधार चक्र हीलिंग।

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