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SSC SI ASI 2018


कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) और उप निरीक्षक (एसआई) के पदों के लिए भर्ती परीक्षा के लिए आवेदनों को आमंत्रित किया है। पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए।लिखित परीक्षा में दो प्रश्न-पत्र  होंगे, जिसमे पेपर-1 और पेपर-2 शामिल है। प्रथम प्रश्न पत्र में चार विषय अर्थात् जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग, जनरल नॉलेज, क्वांटिटेटिव एपटीड्यूड और इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन होंगे। प्रत्येक प्रश्न पत्र कुल 200 अंक का होगा जिसमें उम्मीदवारों को 2 घंटे का समय दिया जायेगा। लिखित परीक्षा पेपर 2 में केवल अंग्रेजी भाषा का पेपर शामिल हैं, जिसमें अधिकतम 200 अंक होंगे।पेपर II में प्रश्न भी बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे और उम्मीदवारों को अंतिम चयन पाने के लिए दोनों लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना आवश्यक है। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.5 अंक की कटौती होगी।

लिखित परीक्षा के पेपर I और II में अंग्रेजी भाषा और कॉम्प्रिहेंशन का सब्जेक्ट होता है और उम्मीदवारों को भाषा का पूर्ण ज्ञान होने के साथ-साथ अच्छी तरह से लिखने की क्षमता और कौशल होना भी आवश्यक हैं। इसे नियमित रूप से पढ़कर और लिखकर प्राप्त किया जा सकता है। अभ्यर्थियों को शब्दों का अच्छा ज्ञान होना चाहिए जिसके लिए दैनिक आधार पर शब्दावली पर काम करना होगा| व्याकरण और इसके अनुप्रयोगों का ज्ञान इस विषय का एक और प्रमुख पहलू है, जिसका उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए। उम्मीदवार को परीक्षा के पहले भाषा की तैयारी करने हेतु बाजार में उपलब्ध अच्छी पुस्तकों का अभ्यास निर्देशित तरीके से करना चाहिए|

अपने मात्रात्मक ज्ञान को बढ़ाये

गणित विषय से डरने वाले उम्मीदवारों को अपनी तैयारी के दौरान मूल बातों को दोहराने और नए सिरे से शुरूआत करने की आवश्यकता है| उम्मीदवारों को मूल गणितीय संचालन व माध्यमिक/ वरिष्ठ कक्षाओं में पढ़ाये जाने वाले सूत्रों के बारे में पता होना चाहिए। उन्हें दिए गए समय के भीतर सवालों के जवाब देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफ़लाइन स्रोतों से शॉर्टकट्स, ट्रिक्स और फ़ार्मुलों को भी सीखना चाहिए।

कर्रेंट अफेयर्स व जनरल नॉलेज

उम्मीदवारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान खबरों से रूबरू होना चाहिए| उन्हें इतिहास, संस्कृति, भूगोल, अर्थव्यवस्था और राजनीति इत्यादि विभिन्न क्षेत्र से संबंधित विषयों के नोटस को भी समय-समय पर तैयार करना चाहिए। इससे उम्मीदवारों को पेपर के सामान्य जागरूकता खंड को हल करने में सहायता मिलेगी। उम्मीदवारों को अख़बारों की रीडिंग करने की नियमित आदत को विकसित करना चाहिए और साथ ही दुनियाभर की सभी जरुरी जानकारी को ऑनलाइन संसाधनों के माध्यम से एकत्र करना चाहिए। घटनाओं को ध्यान में रखते हुए और समय-समय पर उन्हें दोहराने से उम्मीदवारों को पढ़ी गयी सामग्री को याद रखने में और परीक्षा में अधिकतम स्कोर करने में मदद मिलेगी।

जनरल रीजनिंग एंड इंटेलिजेंस का नियमित अभ्यास

ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस, जनरल इंटेलीजेंस और रीज़निंग पेपर में सफलता की कुंजी है। उम्मीदवारों को इस पत्र में मौखिक और गैर मौखिक तर्क से संबंधित सवालों को हल करना होता है। इसके लिए उम्मीदवारों को तार्किक रूप से तेज और जल्दी निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। उम्मीदवारों को पिछले साल के प्रश्नपत्रों व मोक टेस्ट्स को लगातार अभ्यास करके इसमें कौशल विकसित करना चाहिए|

समय प्रबंधन

लिखित परीक्षा में दोनों पेपर में 200 प्रश्न होंगे जिनमें से प्रत्येक के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा। यह कम समय में पूरे प्रश्नपत्र का सटीक रूप से जवाब देने की एकमात्र कुंजी अभ्यास है। इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी अज्ञात प्रश्न पर ज्यादा समय लगाने के बजाय अन्य आसान प्रश्नों को हल करके आगे बढ़ें। उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए तैयारी करते समय टाइमर सेट करना चाहिए ताकि वे सटीक अनुमान प्राप्त कर सकें कि वे प्रश्नों को हल करने के लिए कितना समय लेते हैं और इसे बेहतर किस तरह से कर सकते है|

दर्शन मात्र से होती है हर इच्छा पूरी, देश के 5 चमत्कारी हनुमान मंदिर


हनुमानजी बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले भगवान है। हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता हैं जो आज भी देश में भ्रमण करते हैं। 31 मार्च को हनुमान जयन्ती है ऐसे में आज हम आपको देश के 5 चमत्कारी हनुमान मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर हर भक्त की मनोकामना जरूर पूरी होता है।
संकटमोचन मंदिर
हनुमान जी का यह मंदिर वाराणसी में स्थित है। इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यहां स्थापित मूर्ति गोस्वामी तुलसीदास के तप और प्रताप से प्रकट हुई थी। दर्शन मात्र से हनुमान जी अपने हर भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं।
उलटे हनुमानजी का मंदिर
इंदौर में स्थित उलटे हनुमानजी का मंदिर की पूजा की जाती है। इस मंदिर में हनुमान जी की उलटी प्रतिमा है। यहां ऐसी मान्यता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
हनुमान धारा मंदिर
हनुमान जी का यह मंदिर चित्रकूट में स्थित है। यहां हनुमान जी की विशाल मूर्ति के ठीक पास दो जल के कुंड है। इसकी जलधारा हनुमानजी को छूते हुए बहता है इसलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं। यहां हर मनोकामना पूरी होती है।हनुमान मंदिर, इलाहाबाद
हनुमान जी यह मंदिर संगम किनारे स्थित है। यह भारत का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर हनुमान जी की लेटी हुई 20 फीट की प्रतिमा है। इस मंदिर में हनुमान जी की दर्शन करने मात्र से ही सभी तरह की परेशानियां दूर हो जाती है।
हनुमानगढ़ी मंदिर, अयोध्या
यह मंदिर  हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के लिए 60 सीढियां चढ़नी पड़ती है। यहां पर हर मनोकामना पूरी होती है।

गर्मी के मौसम में फायदेमंद है चीकू

   
चीकू का फल कई तरह के गुणों से भरपूर है, जो आपको रोगों से बचा सकता है।

चीकू खाने के फायदे

आलू की तरह दिखने वाला चीकू गुणों की खान हैं। यह खाने में मीठा और बहुत ही टेस्टी लगता हैं. क्या आपको चीकू खाने के फायदे के बारे में पता हैं? अगर नहीं पता हैं तो यह लेख जरूर पढ़े। जानते हैं चीकू खाने से सेहत को क्या लाभ होते हैं? 

उमस के मौसम में शरीर का पानी पसीने के रूप में बड़ी तेजी के साथ निकलता है। शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाए रखना बेहद जरूरी है। कुछ ठंडा और मीठा पीने की इच्छा लगातार बनी रहती है। साथ ही पेय ऐसा हो जो शरीर को एनर्जी देने के अलावा पौष्टिक भी हो तो क्या कहने। 

चीकू में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो कि एक रेचक प्रभाव रखता है। चीकू खाने से आपके कब्ज की शिकायत दूर हो जाएगी और आपका डाइजेशन सिस्टम भी बढ़िया हो जाएगा। इसके लिए आप इसके ऊपर थोड़ा नमक डाल कर ले। इससे आपको कब्ज दूर करने में मदद मिलेगी और इसके साथ-साथ यह आपके वजन और मोटापे को कम करने में भी मदद करेगा।
चीकू Colon Cancer, Oral Cavity और Lung Cancer जैसी बीमारी से बचाने में मदद करता है। 
चीकू में मौजूद फाइबर हमारे मेंब्रेन को कैंसर जैसी बीमारियों से दूर रखता है।

चीकू में विटामिन मिनरल्स और शुगर जैसे सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसे चीजें होती है। जो कि हमें एनर्जी देने का काम करती है और हमारे बॉडी को फ्री रेडिकल्स जैसी चीजों से बचाती है। इसमें विटामिन A भरपूर मात्रा में होता है जो हमारे आंखों के और त्वचा के हेल्थ के लिए बहुत ही बढ़िया है।

चीकू में टैनिंग होता है जोकि दवाई की तरह काम करता है और यह बवासीर के लिए बहुत ही अच्छा फल है।
यह Inflammation दूर करने में भी मदद करता है। इसके लिए आप चीकू के पत्तों को पानी में गर्म करके उसके बाद पत्तों को निकाल दें और इस पानी को पिए और इस से गरारे भी करें।

चीकू में Haemostatic क्वालिटी होती है जो बवासीर की वजह से होने वाले खून की कमी और इंजरी से होने वाली खून की कमी को दूर करता है।
मीठा खाने व ब्रश ना करने की वजह से दांतों में कैविटी हो जाती है एैसे में आप चीकू का छिलका उतार कर खाएं। क्योंकि इसमें लेक्टस होता है जो इस समस्या का उपचार करता है।

चेहरे की सुंदरता के लिए आप यदि चीकू को खाते हो तो इससे चेहरे की गंदगी तो दूर होगी ही। साथ ही आपके चेहरे पर निखार भी आता है। चेहरे के लिए बहुत ही लाभदायक है ये फल।

चेहरे पर यदि झाइयां पड़ गई हों तो इससे उम्र अधिक लगने लगती है। चीकू खाने वाले लोग जल्दी झुर्रियों का शिकार नहीं होते है। क्योंकि ये फल हमारे चेहरे की त्वचा को टाइट बनाकर कर रखता है।

याददाश्त बढ़ाने के उपाय


आज के समय में हर एक व्यक्ति बिजी है. क्योकि आज के समय में समय इतनी तेजी से निकल रहा है| कि इंसान के पास आज खुद के लिए भी समय नहीं है और ऐसे में ही इतने सारे काम है| जिन्हें करना होता है. ऐसी स्थिति में हर छोटी से छोटी बातो या चीजो को याद रख पाना मुमकिन नहीं है क्योकि हमारा दिमाग आपने हिसाब से ही काम करता है|

मानव आपने दिमाग का केवल 5-8% ही उपयोग करता है| जिसके कारण दिमाग कम और धीमी गति से कार्य करता है. और हम कहते है कि हम कुछ छोटी बातो या चीजो को भूल जाते हैं| यदि हम अपने दिमाग का पूरी तरह से विकास कर लें तो हम बहुत सी होने वाली परेशानियों से बच सकते है. कही बार आपने सुना होगा|

याददाश्त बढ़ाने के उपाय और घरेलू उपचार

कि कुछ लोग ऐसे भी होते है जो किसी भी बात या वस्तु को तुरंत ही भूल जाते है ऐसा नहीं है| कि उन्होंने उनके दिमाग का विकास नहीं किया है ऐसा इसलिए है बल्कि ये एक बीमारी भी होती है| जो की शारीर में जरूरत होने वाले पोष्टिक तत्वों के न होने से होती है| क्योकि आज के समय में न ही कोई खाने पर ध्यान देता है और न ही आपने आप पर|
भूल जाना ये सिर्फ किसी एक के लिए ही नहीं है बल्कि ये समस्या बच्चो को बड़ो को और तो और बूढ़े व्यक्ति में भी हो सकती है| हमारे हर काम करने के लिए दिमाग ही होता है यदि दिमाग ही काम न करे तो इंसान किसी भी काम का नहीं होता है दिमाग से ही हम शारीर से हर काम करते है जैसे ऊँगली को हिलाना और सारे काम आदि|

याददाश्त कमजोर होने के कारण

दिमाग का कमजोर होना ये हमारे रोज की किये गए कामो के कारण ही होता है हमारे दिमाग में पॉवर होता है| जिसके कारण हम हर कम करते है जिन कामो से हमारे दिमाग को नुकसान होता है| उन कामो को हमें तुरंत ही बंद कर देना चाहिए ताकि हम आगे आने वाली समस्या से बच सके और हमारे दिमाग को तेज कर सके|
  1. स्वास्थ मनुष्य को दिन में 24 घंटे में से 7-8 घंटे की नींद लेना जरुरी होता है लेकिन काम के कारण ये नींद पूरी नहीं हो पाती है और दिमाग थक जाता है जिस कारण दिमाग काम करना बंद कर  देता है|
  2. रोज सुबह नाश्ता न करना और देर तक के बिना खाए ही काम करने से|
  3. आवश्यकता से अधिक खाना खाने से, और खास तौर पर रात को सोते समय खाने से|
  4. दिनभर में पानी कम पीना ऐसा करने से सिर्फ दिमाग ही कमजोर नहीं है बल्कि और भी कई सारी परेशानियाँ होती है इसलिए पानी को कभी भी कम नहीं करना चाहिए|
  5. एक ही समय पर एक साथ कई सरे काम करने से दिमाग पर ज्यादा असर होता है और दिमाग में थकान हो जाती है इस कारण से भी दिमाग कमजोर हो जाता है|
  6. किसी भी हानिकारक पदार्थ का सेवन करने से जैसे बीडी, सिगरेट, शराब आदि के सेवन से|
  7. जैसा की आज देखा जा रहा है कि हर कोई काम में इतना बिजी है कि उसे खुद के लिए टाइम ही नहीं है और ऐसे में वे बहुत ही अधिक चिंता करता है जो की दिमाग को सबसे अधिक कमजोर बनाने  का काम करती है इसलिए चिंता अधिक नहीं करना चाहिए|

दिमाग कमजोर होने के लक्षण

  • कोई भी बात या किसी भी चीज को बहुत ही जल्द भूल जाना|
  • दिमाग को थका हुआ महसूस करना|
  • सिर अधिक दर्द होना|
  • किसी काम को करने में अधिक समय लगना|
  • चोट लगने पर तुरंत उसका पाता न चलना|
  • आपको ऐसा महसूस होना की आपके दिमाग का विकास नहीं हो रहा है|
  • किसी भी काम में मन नहीं लगना|

दिमाग की स्मृति शक्ति को बढ़ने के उपचार

बादाम: एक गिलास पानी लीजिये और 5-7 बादाम के लेगे पानी में गला दे| और रात भर रखे रहने दे फिर सुबह उठ कर बादाम के छिलके को निकल ले और बारीक़ पेस्ट बना ले इस पेस्ट में 2 चम्मच शहद मिलाकर इस पेस्ट को एक गिलास दूध में मिलकर पी ले|

कश्मीर

प्राकृतिक दृष्टि से कश्मीर को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :
  • जम्मू क्षेत्र की बाह्य पहाड़ियाँ तथा मध्यवर्ती पर्वतश्रेणियाँ,
  • कश्मीर घाटी,
  • सुदूर बृहत्‌ मध्य पर्वतश्रेणियाँ जिनमें लद्दाख, बल्तिस्तान एवं गिलगित के क्षेत्र सम्मिलित हैं।

कश्मीर धरती पर स्वर्ग

कश्मीर का अधिकांश भाग चिनाव, झेलम तथा सिंधु नदी की घाटियों में स्थित है। केवल मुज़ताघ तथा कराकोरम पर्वतों के उत्तर तथा उत्तर-पूर्व के निर्जन तथा अधिकांश अज्ञात क्षेत्रों का जल मध्यएशिया की ओर प्रवाहित होता है। लगभग तीन चौथाई क्षेत्र केवल सिंधु नदी की घाटी में स्थित है। जम्मू के पश्चिम का कुछ भाग रावी नदी की घाटी में पड़ता है। पंजाब के समतल मैदान का थोड़ा सा उत्तरी भाग जम्मू प्रांत में चला आया है। झेलम की घाटी में कश्मीर घाटी, निकटवर्ती पहाड़ियाँ एवं उनके मध्य स्थित सँकरी घाटियाँ तथा बारामूला-किशनगंगा की संकुचित घाटी का निकटवर्ती भाग सम्मिलित है। सिंधु नदी की घाटी में ज़ास्कर तथा रुपशू सहित लद्दाख क्षेत्र, बल्तिस्तान, अस्तोद एवं गिलगित क्षेत्र पड़ते हैं। कश्मीर घाटी में जल की बहुलता है। वुलर मीठे पानी की भारतवर्ष में विशालतम झील है। कश्मीर में सर्वाधिक मछलियाँ इसी झील से प्राप्त होती हैं। स्वच्छ जल से परिपूर्ण डल झील तैराकी तथा नौकाविहार के लिए अत्यंत रमणीक है। तैरते हुए छोटे-छोटे खत सब्जियाँ उगाने के व्यवसाय में बड़ा महत्व रखते हैं। कश्मीर अपनी सुंदरता के कारण नंदनवन कहलाता है। अखरोट, बादाम, नाशपाती, सेब, केसर, तथा मधु आदि का प्रचुर मात्रा में निर्यात होता है। कश्मीर केसर की कृषि के लिए प्रसिद्ध है।

जम्मू और कश्मीर के पर्यटन स्थल

श्रीनगर

श्रीनगर का जम्मू और कश्मीर के पर्यटन स्थलों में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। कश्मीर घाटी के मध्य में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। श्रीनगर एक ओर जहाँ डल झील के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी ओर विभिन्न मंदिरों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। स्वच्छ झील और ऊँचे पर्वतों के बीच बसे श्रीनगर की अर्थव्यवस्था का आधार लम्बे समय से मुख्यतः पर्यटन है। शहर से होकर नदी के प्रवाह पर सात पुल बने हुए हैं। इससे लगे विभिन्न नहरों एवं जलमार्गों में शिकारे भरे पड़े हैं। श्रीनगर अपने मन्दिरों और मस्जिदों के लिए प्रसिद्ध है। श्रीनगर से लगी एक पहाड़ी जिसको शंकराचार्य पहाड़ी कहते हैं, ऊपर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित शिवलिंग है। पहाड़ी की 2 मील कठिन चढ़ाई है। पर्वत के नीचे शंकरमठ है, इसे दुर्गानाग मंदिर कहते हैं। श्रीनगर में महाश्री का मंदिर चौथे पुल के पास तथा हरिपर्वत पर एक मंदिर है। संपूर्ण कश्मीर दर्शनीय है। नगर में पत्थर मस्जिद, नेहरू उद्यान दर्शनीय हैं और मुग़ल उद्यान तो अपने सौंदर्य के लिए ही प्रसिद्ध है। इन सब स्थानों पर मोटर बसें जाती हैं। श्रीनगर से मोटर बस से पहलगाँव जाते समय मध्य में अनन्तनाग है। मार्तण्ड मंदिर पर्वत पर है।

डल झील

डल झील श्रीनगर, कश्मीर में एक प्रसिद्ध झील है। डल झील के मुख्य आकर्षण का केन्द्र है यहाँ के शिकारे या हाउसबोट। सैलानी इन हाउसबोटों में रहकर झील का आनंद उठा सकते हैं। नेहरू पार्क, कानुटुर खाना, चारचीनारी आदि द्वीपों तथा हज़रत बल की सैर भी इन शिकारों में की जा सकती है। इसके अतिरिक्त दुकानें भी शिकारों पर ही लगी होती हैं और शिकारे पर सवार होकर विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ भी खरीदी जा सकती हैं। तरह तरह की वनस्पति झील की सुंदरता को और निखार देती है। कमल के फूल, पानी में बहती कुमुदनी, झील की सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। सैलानियों के लिए विभिन्न प्रकार के मनोरंजन के साधन जैसे कायाकिंग (एक प्रकार का नौका विहार), केनोइंग (डोंगी), पानी पर सर्फिंग करना तथा ऐंगलिंग (मछली पकड़ना) यहाँ पर उपलब्ध कराए गए हैं।

गुलमर्ग   

प्रसिद्ध सौंदर्य, प्रमुख स्थान और निकटता श्रीनगर के गुलमर्ग का अर्थ है "फूलों की वादी"। जम्मू - कश्मीर के बारामूला जिले में लग - भग 2730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग, की खोज 1927  में अंग्रेजों ने की थी। यह पहले “गौरीमर्ग” के नाम से जाना जाता था, जो भगवान शिव की पत्नी "गौरी" का नाम है। फिर कश्मीर के अंतिम राजा, राजा युसूफ शाह चक ने इस स्थान की खूबसूरती और शांत वारावरण में मग्न होकर इसका नाम गौरीमर्ग से गुलमर्ग रख दिया। वैसे तो सैलानी साल के किसी भी मौसम में गुलमर्ग घूमने जा सकते हैं। पर गुलमर्ग की खूबसूरती देखने का सबसे बढिया समय मार्च और अक्टूबर के बीच है। गुलमर्ग का सुहावना मौसम, शानदार परिदृश्य, फूलों से खिले बगीचे, देवदार के पेड, खूबसूरत झीले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गुलमर्ग अपनी हरियाली और सौम्य वातावरण के कारण आज एक पिकनिक और कैम्पिंग स्पॉट बन गया है। निंगली नल्लाह, वरिनग और फिरोजपुर नल्लाह यहाँ के कुछ प्रमुख नल्लाहे हैं। कहा जाता है कि वरिनग नल्लाहे के पानी में कुछ औषधीय गुण मौजूद है, जिसके कारण यहाँ कई सैलानी आते हैं। बायोस्पीयर रिज़र्व भी गुलमर्ग का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।

सोनमर्ग

सोनमर्ग या सोनामर्ग भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के गान्दरबल ज़िले में ३,००० मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक पर्वतीय पर्यटक स्थल है। यह सिन्द नाले (सिन्धु नदी से भिन्न) नामक नदी की घाटी में है। सोनमर्ग से आगे ऊँचे पर्वत हैं और कई प्रसिद्ध हिमानियाँ (ग्लेशियर) स्थित हैं और यहाँ से पूर्व लद्दाख़ का रास्ता निकलता है। 2730 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है,   गर्मियों के महीनों के दौरान एक प्रमुख स्थानीय आकर्षण है सोनमर्ग जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो समुद्र सतह से 2740 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। बर्फ से आच्छादित पहाड़ों से घिरा हुआ सोनमर्ग शहर जोजी-ला दर्रे के पहले स्थित है। सोनमर्ग का शाब्दिक अर्थ है “सोने के मैदान”। इस स्थान का नाम इस तथ्य के आधार पर पड़ा कि वसंत ऋतु में यह सुंदर फूलों से ढँक जाता है जो सुनहरा दिखता है।  पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो वे भी सुनहरी दिखती हैं। सोनमर्ग उन यात्रियों के लिए उचित गंतव्य है जो साहसिक गतिविधियों जैसे ट्रेकिंग या पैदल लंबी यात्रा में रूचि रखते हैं। सभी महत्वपूर्ण ट्रेकिंग के रास्ते सोनमर्ग से ही प्रारंभ होते हैं जो इसे ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय स्थान बनाते हैं। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है जिसमें झीलें, दर्रे और पर्वत शामिल हैं। सोनमर्ग अमरनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए प्रारंभ बिंदु की तरह है। कब सैर करें? इस स्थान की सैर के लिए उत्तम समय मई से नवंबर के बीच और नवंबर से अप्रैल के बीच होता है। मई से अक्टूबर के बीच का समय दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए उत्तम होता है। नवंबर से अप्रैल के बीच पर्यटक बर्फ़बारी का आनंद उठा सकते हैं।

 लद्दाख

एक देश में भयानक भौतिक सुविधाएँ, एक विशाल और शानदार वातावरण में सेट abounding एक पहाड़ी रेगिस्तान के लिए 25,000 लद्दाख 9.000 फुट से लेकर ऊंचाई पर स्थित है है। दुनिया की ताकतवर पर्वत श्रृंखला, उत्तर में काराकोरम और हिमालय, दक्षिण में से दो से घिरा यह दो अन्य समानांतर चेन द्वारा, लद्दाख श्रृंखला और जांस्कर श्रेणी तय की है। लेह लद्दाख का दौरा इन स्थानों के रूप में प्राकृतिक सुंदरता का एक बहुत एक महान अनुभव किया जा सकता। यह सुंदर पहाड़ी क्षेत्र है, हर साल स्थानीय के रूप में अच्छी तरह से विदेशी पर्यटकों की एक बड़ी संख्या द्वारा दौरा किया है। यह दोनों एक लोकप्रिय गर्मियों के साथ ही एक शीतकालीन छुट्टी गंतव्य है। अपने अछूता सौंदर्य, बर्फ से ढंकी पर्वत चोटियों, हरियाली और एकांत जगहों भी हनीमून का एक बहुत आकर्षित। यह सब नहीं है। यह ट्रेकिंग जैसे, माउंटेन बाइकिंग, की पेशकश की है साहसिक गतिविधियों की सीमा के साथ राफ्टिंग, पर्वतारोहण और इतने पर, यह भी साहसिक उत्साही के बीच अच्छी तरह से जाना जाता है। तिब्बती हस्तशिल्प वस्तुओं, प्रार्थना पहियों सहित लद्दाख में बौद्ध मास्क और थंग्का चित्र खरीदा जा सकता है। तिब्बती चांदी के गहने और मरकत के साथ पारंपरिक लद्दाखी गहने भी पर्यटकों के साथ लोकप्रिय हैं। खुबानी कि बहुतायत से लद्दाख में विकसित एक अन्य लोकप्रिय उपहार है कि आप अपनी यात्रा के एक स्वादिष्ट स्मारिका के रूप में वापस करने के लिए लद्दाख ले जा सकते हैं कर रहे हैं। लेह से दिल्ली से एयर कनेक्ट किया गया है और यह दिल्ली से लेह तक पहुंचने के लिए लगभग 65 मिनट लेता है। जम्मू से सड़क मार्ग से श्रीनगर के लिए और फिर लेह, जो 430 किलोमीटर दूर से अधिक है करने के लिए सिर कर सकते हैं। यह के बारे में एक दो दिन की यात्रा श्रीनगर से कारगिल में एक रात पड़ाव के साथ है। श्रीनगर से लेह के लिए सड़क पर आप उच्च Zoji ला दर्रा पार, और पिछले Mulbek की यात्रा है, जहां मैत्रेय बुद्ध की एक विशाल छवि। Namika ला और Fotu ला गुजरता और स्पितुक गोम्पा श्रीनगर से लेह के लिए सड़क पर दर्शनीय आकर्षण हैं।

वैष्णो देवी

यह जम्मू और कश्मीर के राज्य में समुद्र स्तर से ऊपर 5,200 फुट की ऊंचाई पर स्थित 61 किमी जम्मू उत्तर है। कहते हैं पहाड़ों वाली माता वैष्णो देवी सबकी मुरादें पूरी करती हैं। उसके दरबार में जो कोई सच्चे दिल से जाता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। ऐसा ही सच्चा दरबार है- माता वैष्णो देवी का। माता का बुलावा आने पर भक्त किसी न किसी बहाने से उसके दरबार पहुँच जाता है। हसीन वादियों में त्रिकूट पर्वत पर गुफा में विराजित माता वैष्णो देवी का स्थान हिंदुओं का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं। कटरा व जम्मू के नज़दीक कई दर्शनीय स्थल ‍व हिल स्टेशन हैं, जहाँ जाकर आप जम्मू की ठंडी हसीन वादियों का लुत्फ उठा सकते हैं। जम्मू में अमर महल, बहू फोर्ट, मंसर लेक, रघुनाथ टेंपल आदि देखने लायक स्थान हैं। जम्मू से लगभग 112 किमी की दूरी पर 'पटनी टॉप' एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। सर्दियों में यहाँ आप स्नो फॉल का भी मजा ले सकते हैं। कटरा के नजदीक शिव खोरी, झज्झर कोटली, सनासर, बाबा धनसार, मानतलाई, कुद, बटोट आदि कई दर्शनीय स्थल हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
  • वैसे तो माँ वैष्णो देवी के दर्शनार्थ वर्षभर श्रद्धालु जाते हैं परंतु यहाँ जाने का बेहतर मौसम गर्मी है।
  • सर्दियों में भवन का न्यूनतम तापमान -3 से -4 डिग्री तक चला जाता है और इस मौसम से चट्टानों के खिसकने का खतरा भी रहता है। अत: इस मौसम में यात्रा करने से बचें।
  • ब्लड प्रेशर के मरीज चढ़ाई के लिए सीढि़यों का उपयोग ‍न करें।
  • भवन ऊँचाई पर स्थित होने से यहाँ तक की चढ़ाई में आपको उलटी व जी मचलाने संबंधी परेशानियाँ हो सकती हैं, जिनसे बचने के लिए अपने साथ आवश्यक दवाइयाँ जरूर रखें।
  • चढ़ाई के वक्त जहाँ तक हो सके, कम से कम सामान अपने साथ ले जाएँ ताकि चढ़ाई में आपको कोई परेशानी न हो।
  • पैदल चढ़ाई करने में छड़ी आपके लिए बेहद मददगार सिद्ध होगी।
  • ट्रेकिंग शूज चढ़ाई में आपके लिए बहुत आरामदायक होंगे।
  • माँ का जयकारा आपके रास्ते की सारी मुश्किलें हल कर देगा

Bill Gates - Founder Microsoft


Microsoft की शुरुवात
Bill की कुशाग्रता न केवल Software बनाने में थी. उसके साथ-साथ Business को भी आगे बढाने और Company को टॉप पर ले जाने की थी. उन्होंने जो कहा उन्होंने वैसा काम भी किया. Company में Employees द्वारा बनाये गए Code को वे जरूरत पढने पर खुद चेक करते और Error को निकाल देने का काम स्वयं किया करते थे. Bill की मेहनत और लगन की वजह से Company की तरक्की दिन ब दिन Apple, Intel और IBM जैसी Hardware बनाने वाली Company की तरह बढती जा रही थी. Bill लगातार लोगों से Microsoft द्वारा बनाई गई Application के बारे में Feedback लिया करते और लोगों की जरुरतो के हिसाब से Apps में बदलाव किया करते. उनकी माँ Mary बहुत ही इज्ज़तदार व्यक्तियों में से एक के साथ, उनके IBM Board के Members से संबंध बहुत अच्छे भी थे. Mary के ही कारण Bill IBM के CEO से मिल पाए.
नवम्बर 1980 में IBM एक ऐसा Software चाहता था जिससे अपना Personal Computer चला सके और इस Software को बनाने के लिए उन्होंने Microsoft के सामने प्रस्ताव रखा. IBM के CEO से पहली मुलाक़ात के वक़्त किसी ने Bill को ऑफिस का एक कर्मचारी समज्ञ कर उन्हें सबको कॉफ़ी पिलाने को कहा उस वक़्त Bill काफी जवान दीखते थे और जल्दी ही IBM उनसे Impress हो गये. और Bill ने उन्हें Software बनाने के लिए राज़ी कर लिया, कि वे उनके Software से जुडी सारी जरूरते पूरी कर लेंगे. लेकिन परेशानी यह थी कि Microsoft Company IBM के लिए Basic Operating System नही बना पाया जो IBM के नए Computer को चला सके, लेकिन यह कोई अंत नहीं था.
Bill ने एक ऐसा Operating System ख़रीदा जो इस प्रकार बना हुआ था जो कि IBM के Personal Computer के समान्तर काम करता था. उन्होंने उस Operating System के Developers से मिल कर पूरा Licence, Microsoft के नाम करने को कहा लेकिन उन्हें IBM के सौदे के बारे कुछ भी नहीं बताया. Company ने बाद में Microsoft पर मुकदमा चलाया की उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारीयां (IBM की Deal) उनसे छुपा कर रखी.
यह सब हो जाने के बाद Bill को उस Software का Licence मिल गया और उस O.S. का नाम रखा MS-DOS.
Microsoft ने इसी के साथ एक और Software बनाया जिसका नाम था Softcard जो Microsoft के Basic के साथ Apple 2 Machine में भी काम करता था.
इन 1978-1981 के बिच Microsoft की Growth धमाकेदार थी और उनका Staff 25 से बढकर 128 हो गया था. उनका Profit भी $4 Million से बढ़कर $16 Million तक पहुँच गया था . 1981 के मध्य में Gates Microsoft के President के साथ-साथ Chair Man बन गये थे और Allen, Executive Vice President बन गये.
1998 तक Microsoft का Business दुनियाभर में फ़ैल चूका था उनके Office भी Great Britain और Japan में खुल चुके थे उसी के साथ दुनिया के 30% Computer उन्ही के बनाये गये Software पर चल रहे थे. लेकिन 1983 में MICROSOFT की एक और उसके Foundation से जुडी News आई की Paul Allen, Hodgkin’s नामक बीमारी से पीड़ित हो गये थे. वैसे उनका Cancer एक साल के Treatment के बाद छुट गया था लेकिन उन्होंने उसी साल Microsoft को इस्तीफा दे दिया था.
Bill के मानव प्रेमी कार्य (Bill’s Philanthropic Efforts)
Bill को दुनिया में फैली हुए कई universities से सम्मान पुरुस्कार मिला Feb.2014 में bill ने chairman के पद से हटकर खुद को एक नयी position जो की technology सलाहकार की थी देने की घोषणा की और bill ने 2014 में भारत के 46 वर्षीय satya nadella को CEO बनाया.
2006 BILL ने अपने MICRO-SOFT के पुरे कार्य के समय को छोड़कर , अपना पूरा समय FOUNDATION के कार्यो में व्यतित करने की घोषणा की ताकि वे और ज्यादा अच्छा वक्त FOUNDATION के साथ बिता सके.
BILL का MICROSOFT COMPANY में आखरी दिन 27,JUNE 2008 था.
सब मिलाकर उन्हें जिंदगी में यह पुरुस्कर मिला है की आज वे दुनिया के सबसे कामयाब और अमीर BUSINESS MAN है. और उनकी काबिलियत की मिसाल दुनिया के इतिहास में छप गयी है. एक अच्छे BUSINESS MAN होने के साथ ही उन्हें उनके मानव प्रेमी स्वभाव के कारण और अनगिनत धन संपत्ति दान करने के लिए कई पुरुस्कारों से नवाजा गया है. 
Bill के मानव प्रेमी कार्य (Bill’s Philanthropic Efforts)
Bill को दुनिया में फैली हुए कई universities से सम्मान पुरुस्कार मिला Feb.2014 में bill ने chairman के पद से हटकर खुद को एक नयी position जो की technology सलाहकार की थी देने की घोषणा की और bill ने 2014 में भारत के 46 वर्षीय satya nadella को CEO बनाया.
2006 BILL ने अपने MICRO-SOFT के पुरे कार्य के समय को छोड़कर , अपना पूरा समय FOUNDATION के कार्यो में व्यतित करने की घोषणा की ताकि वे और ज्यादा अच्छा वक्त FOUNDATION के साथ बिता सके.
BILL का MICROSOFT COMPANY में आखरी दिन 27,JUNE 2008 था.
सब मिलाकर उन्हें जिंदगी में यह पुरुस्कर मिला है की आज वे दुनिया के सबसे कामयाब और अमीर BUSINESS MAN है. और उनकी काबिलियत की मिसाल दुनिया के इतिहास में छप गयी है. एक अच्छे BUSINESS MAN होने के साथ ही उन्हें उनके मानव प्रेमी स्वभाव के कारण और अनगिनत धन संपत्ति दान करने के लिए कई पुरुस्कारों से नवाजा गया है.

Steven Paul Steve Jobs - Founder APPLE .

  • नाम-  Steven Paul Steve Jobs (स्टीवन पॉल “स्टीव” जॉब्स)
  • जन्म- 24 फरवरी 1955   स्थान- सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका)
  • मृत्यु- 5 अक्टूबर 2011 (उम्र) 56 साल  पालो आल्टो, केलिफोर्निया
  • परिचय- एप्पल के संस्थापक
  • पुरस्कार- एप्पल कंप्यूटर को “मशीन ऑफ़ दी इयर” का खिताब, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नेशनल मैडल ऑफ़ टेक्नोलॉजी अवार्ड, साम्युल ऑफ़ बीएड, केलिफोर्निया हाल ऑफ़ फेम, इतना ही नहीं मरने के बाद ग्रेमी न्यासी अवार्ड, आदि.
 स्टीवन पॉल स्टीव जॉब्स का परिचय 
24 फरवरी 1955 को केलिफोर्निया में जन्मे Steve Jobs का जीवन जन्म से हि संघर्ष पूर्ण था, उनकी माँ अविवाहित कॉलेज छात्रा थी. और इसी कारण वे उन्हें रखना नहीं चाहती थी, और Steve Jobs को किसी अच्छे परिवार में गोद देने का फैसला कर दिया. लेकिन जो गोद लेने वाले थे उन्होंने ये कहकर मना कर दिया की वे लड़की को गोद लेना चाहते हैं. फिर  Steve Jobs को केलिफोर्निया में रहने वाले पॉल (Paul) और कालरा (Kaalra) जॉब्स ने गोद ले लिया. 

जब Steve Jobs 5 साल के हुए, तब उनका परिवार केलिफोर्निया के पास हि स्थित माउंटेन व्यू (Mountain View) चला गया. पॉल मैकेनिक थे, और स्टीव को इलेक्ट्रॉनिक की चीजो के बारे में और कालरा एकाउंटेंट थी इसलिए वे स्टीव की पढाई में मदद किया करती थी.

स्टीव Steve ने मोंटा लोमा स्कूल Monta loma school में दाखिला (Admission) लिया और वही पर अपनी प्राथमिक (Primary) शिक्षा पूरी की. इसके बाद वे उच्च शिक्षा (High school) कूपटिर्नो जूनियर हाई स्कूल (kuptirno juniar high school) से पूरी की.

और सन 1972 में अपनी कॉलेज की पढाई के लिए ओरेगन (Oregan) के रीड कॉलेज (Read College) में दाखिला लिया जो की वहां की सबसे महंगी कॉलेज थी. Steve पढने में बहुत ही ज्यादा अच्छे थे लेकिन, उनके माता-पिता पूरी फीस नहीं भर पाते थे, इसलिए स्टीव Steve ने फीस भरने के लिए बोतल के कोक को बेचकर पैसे जुटाते, और पैसे की कमी के कारण मंदिरों में जाकर वहा मिलने वाले मुफ्त खाना खाया करते थे. और अपने होस्टल (hostel) का किराया बचाने के लिए अपने दोस्तों के कमरों में जमीन पर हि सो जाया करते थे. इतनी बचत के बावजूद फीस के पैसे पुरे नहीं जुटा पाते और अपने माता-पिता को कढ़ी मेहनत करता देख उन्होंने कॉलेज छोड़कर उनकी मदद करने की सोची.

लेकिन उनके माता-पिता उनसे सहमत नहीं थे. इसलिए अपने माता-पिता के कहने पर कॉलेज में नहीं जाने के स्थान पर क्रेटीव क्लासेज (creative classes) जाना स्वीकार किया. जल्दी ही उसमे स्टीव को रूचि बढ़ने लगी. क्लासेस जाने के साथ-साथ वे अटारी Atari नाम की कंपनी में technician का काम करने लगे.
स्टीव Steve आध्यात्मिक जीवन में बहुत विश्वास करते थे, इसलिए Steve अपने धर्म गुरु से मिलने भारत आए. और काफी समय भारत में गुजारा. भारत में रहने के दौरान उन्होंने पूरी तरह बौद्ध धर्म को अपना लिया और बौद्ध भिक्षु के जैसे कपडे पहनना शुरू किया. और पूरी तरह आध्यातिमिक हो गये. और भारत से वापिस कैलिफ़ोर्निया चले गए.
एप्पल कंपनी की शुरुआत 
सन 1976 में मात्र 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने एप्पल Apple कंपनी की शुरुआत कि. स्टीव Steve ने अपने स्कूल के सहपाठी (classmate) मित्र वोजनियाक Vozniyaak के साथ मिल कर अपने पिता के गैरेज में ऑपरेटिंग सिस्टम मेकिनटोश (macentosh) तैयार किया. और इसे बेचने के लिए एप्पल कंप्यूटर (apple computer) का निर्माण करना चाहते थे. लेकिन पैसो की कमी के कारण समस्या आ रही थी. लेकिन उनकी ये समस्या उनके एक मित्र माइक मर्कुल्ला (mike murkulla) ने दूर कर दि साथ ही वे कंपनी में साझेदार partner भी बन गये. और स्टीव ने एप्पल कंप्यूटर बनाने की शुरुआत की.

साथ हि उन्होंने अपने साथ काम करने के लिए Pepsi, Coca Cola कंपनी के मुख्य अधिकारी जॉन स्कली (John Skli) को भी शामिल कर लिया. स्टीव और उनके मित्रो की कढ़ी मेहनत के कारण कुछ ही सालो में एप्पल कंपनी गैराज से बढ़कर 2 अरब डॉलर और 4000 कर्मचारियो employs वाली कंपनी बन चुकी थी.

एप्पल कंपनी से इस्तीफा
लेकिन उनकी ये उपलब्धि ज्यादा देर तक नहीं रही, उनके साझेदारो द्वारा उनको ना पसंद किये जाने और आपस में कहासुनी के कारण एप्पल कंपनी की लोकप्रियता popularity कम होने लगी. धीरे-धीरे कंपनी पूरी तरह कर्ज में डूब गयी. और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर board of director की मीटिंग में सारे दोष स्टीव का ठहराकर सन 1985 में उन्हें एप्पल कंपनी से बाहर कर दिया. ये उनके जीवन का सबसे दुखद पल था.
क्योकि जिस कंपनी को उन्होंने कढ़ी मेहनत और लग्न से बनाया था उसी से उन्हें निकाल दिया गया था. स्टीव के जाते ही कंपनी पूरी तरह कर्ज में डूब गयी.
एप्पल से इस्तीफा (Re-sine latter) देने के 5 साल बाद उन्होंने Next-ink नाम की और Pixer नाम की दो कंपनियों की शुरुआत की. Next-ink में उपयोग की जाने वाली तकनीक उत्तम थी. और उनका उदेश्य बेहतरीन सॉफ्टवेर software बनाना था. और Pixer कंपनी में animation का काम होता था. एक साल तक काम करने के बाद पैसो की समस्या आने लगी और Rosh perot के साथ साझेदारी कर ली. और पेरोट ने अपने पैसो का निवेश किया. सन 1990 में Next-ink ने पहला कंप्यूटर बाज़ार में उतारा लेकिन बहुत ही ज्यादा महंगा होने के कारण बाजार में नहीं चल सका. फिर Next-ink ने Inter personal computer बनाया जो बहुत ही ज्यादा लोक प्रिय हुआ. और Pixer ने एनिमेटेड फिल्म Toy story बनायीं जो अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म हैं.
एप्पल कंपनी में वापसी 
सन 1996 में एप्पल ने स्टीव की Pixer को ख़रीदा इस तरह उनके एप्पल में वापसी हुई. साथ ही वे एप्पल के chief executive officer बन गये. सन 1997 में उनकी मेहनत के कारण कंपनी का मुनाफा बढ़ गया और वे एप्पल के सी.इ.ओ. C.E.O बन गये. सन 1998 में उन्होंने आईमैक I-mac को बाज़ार में लॉन्च launch किया, जो काफी लोकप्रिय हुआ. और एप्पल ने बहुत ही बड़ी सफलता हासिल कर ली. उसके बाद I-pad, I-phone, I-tune भी लॉन्च किये. सन 2011 में सी.ई.ओ. पद से इस्तीफा दे दिया और board के अध्यक्ष बन गये. उस वक्त उनकी property $7.० बिलियन billion हो गयी थी. और apple दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन गयी थी.
निधन 
स्टीव को सन 2003 से pain creative नाम की कैंसर की बिमारी हो गयी थी. लेकिन फिर भी वे रोज कंपनी में जाते ताकि लोगो को बेहतरीन से बेहतरीन technology प्रदान कर सके. और कैंसर कि बिमारी के चलते 5 Oct. 2011 को Paalo Aalto केलिफोर्निया में उनका निधन हो गया.

Sab kuch

मूलाधार चक्र हीलिंग।

  https://youtu.be/APq3mCgb3fM?si=D1nkuyqimWfZXSyp ये वीडियो जरूर देखें, मूलाधार चक्र हीलिंग का है ,रात को सोने से पहले जरूर देखें बहुत पावर...