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Technology फोल्डबेल स्क्रीन स्मार्टफोन ZTE Axon M लॉन्च


एक्सॉन एम कंपनी का पहला डुअल डिस्प्ले स्मार्टफोन है ZTE Axon M को फिलहाल अमेरिका में लॉन्च किया गया है, फिलहाल, भारतीय मार्केट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, हमने कई स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों द्वारा फोल्डबेल स्मार्टफोन पर काम करने के बारे में अब तक सुना था। लेकिन ऐसा करने में कामयाब हुई है ज़ेडटीई। एक्सॉन एम कंपनी का पहला डुअल डिस्प्ले स्मार्टफोन है जो एक हिंज से जुड़ा है। ZTE Axon M को फिलहाल अमेरिका में लॉन्च किया गया है और इसे आने वाले महीने में उपलब्ध कराया जाएगा। चीनी कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि एक्सॉन एम आने वाले महीनों में चीन, यूरोप और जापान में भी पेश किया जाएगा।
ZTE नए एक्सॉन एम हैंडसेट की मार्केटिंग मल्टीमीडिया डिवाइस के तौर पर कर रही है। बताया गया है कि फोल्ड करने के बाद यह हैंडसेट आसानी से पॉकेट में फिट हो जाएगा। स्मार्टफोन में चार मोड दिए गए हैं, जिसमें डुअल मोड भी शामिल है। इस मोड में यूज़र दो अलग-अलग ऐप को अलग-अलग स्क्रीन पर एक साथ चला सकेंगे। एक्सटेंडेड मोड में यूज़र ईमेल स्ट्रीम कर सकते हैं या पूरे 6.75 इंच के फुल-एचडी स्क्रीन पर गेम खेल सकते हैं। मिरर मोड में यूज़र किसी कंटेंट की दोनों ही स्क्रीन पर मिरर कर सकते हैं। ट्रेडिशनल मोड में यूज़र डिवाइस को आम स्मार्टफोन की तरह इस्तेमाल कर पाएंगे।
स्पेसिफिकेशन की बात करें तो ZTE Axon M में दो 5.2 इंच के डुअल फुल-एचडी टीएफटी एलसीडी डिस्प्ले हैं। इन पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 की प्रोटेक्शन मौज़ूद है। हैंडसेट में स्नैपड्रैगन 821 प्रोसेसर का इस्तेमाल हुआ है जो थोड़ा पुराना है। यह 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज के साथ आता है। मज़ेदार बात यह है कि फोन में सिर्फ एक 20 मेगापिक्सल का कैमरा है जो रियर के साथ फ्रंट कैमरे की भी भूमिका निभाएगा। कैमरे का अपर्चर एफ/1.8 है। एंड्रॉयड 7.1.2 नूगा पर चलने वाले इस हैंडसेट में 3180 एमएएच की बैटरी है और यह क्विक चार्ज 3.0 को सपोर्ट करती है।

लॉन्च के मौके पर कंपनी ने कहा कि ज़ेडटीई एक्सॉन एम स्मार्टफोन की क्षमता पहचानने की दिशा में एक अहम कदम है। और इसमें ज़ेडटीई सबसे आगे है।

Very nice Lines

*ये ना पूछना*
      *ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है,*
   *क्योकि शिकायते तो उन्हें भी है*
      *जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है* 

आज का मीठा मोती

💧 **💧
* इंसान कहता है खुशिया आये तो मै मुस्कुराऊ, और खुशियां कहती है तू मुसकुराऐ तो में आऊ।*
            *सदा मुस्कुराते रहिये*
              😃😃😃

What is Karam? How it works?

**
☺: *अनजाने कर्म का फल* :☺
_VERY INTRESTING_

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला ।
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।

ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....

बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका (Pending) रहा ....

फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि "देखो भाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"

बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय यमराज ने फैसला (decision) ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।

यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका (role) भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।

बस इसी घटना के तहत *आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से (बुराई) करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं !*

अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि  *हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया....??*

ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं ....


☺: *A very deep philosophy of Karma example* ☝

जीवन एक खोज

एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है,
बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,

दाँत ब्रश करता है,

नहाता है,

कपड़े पहनकर तैयार होता है, अखबार पढता है,

नाश्ता करता है,

घर से काम के लिए निकल जाता है,

बाहर निकल कर रिक्शा करता है, फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है,

वहाँ पूरा दिन काम करता है, साथियों के साथ चाय पीता है,
 शाम को वापिस घर के लिए निकलता है,

घर के रास्ते में

बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,

मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है,

अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई "हिन्दू" या "मुसलमान" मिला ?

क्या उसने दिन भर में किसी "हिन्दू" या "मुसलमान" पर कोई अत्याचार किया ?

उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया,

दूध वाले भैया,

रिक्शा वाले भैया,

बस कंडक्टर,

ऑफिस के मित्र,

आंगतुक,

पान वाले भैया,

चाय वाले भैया,

टॉफी की दुकान वाले भैया,

मिठाई की दूकान वाले भैया..

जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें "हिन्दू" या "मुसलमान" कहाँ है ?

"क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई, तू "हिन्दू" है या "मुसलमान" ?

अगर तू "हिन्दू" या "मुसलमान" है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा,

तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा,

तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा,

क्या उसने साबुन, दूध, आटा, नमक, कपड़े, जूते, अखबार, टॉफी, मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि ये सब बनाने और उगाने वाले "हिन्दू" हैं या "मुसलमान" ?

"जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग "हिन्दू" या "मुसलमान" नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि "चुनाव" आते ही हम "हिन्दू" या "मुसलमान" हो जाते हैं ?

समाज के तीन जहर

टीवी की बेमतलब की बहस

राजनेताओ के जहरीले बोल

और  कुछ कम्बख्त लोगो के सोशल मीडिया के भड़काऊ मैसेज

इनसे दूर रहे तो  शायद बहुत हद तक समस्या तो हल हो ही जायेगी.

सिर्फ पढ़े लिखे लोग शेयर करे। पढ़ा लिखा समझकर ही आपको भेजा है।।।
पसंद आये तो share करे एवं देश की जनता को मजबूत करे​🙏

Chhattisgarhi kavita

कभू-कभू मोर मन मं,
           ये खियाल आवत हे।
इडली-दोसा ह संगी,
          सबो झन ल मिठावत हे।
चिला-फरा ह काबर,
           कोनो ल नइ भावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
           छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

दूसर के रंग मं संगी,
            खुद ल रंगावत हे।
बासी-चटनी बोजइया,
            पुलाव ल पकावत हे।
पताल के झोझो नदागे,
           मटर-पनीर सुहावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
           छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

अंगाकर के पूछइया,
               पिज्जा हट जावत हे।
बोबरा-चौसेला छोर के,
         सांभर-बड़ा सोरियावत हे।
भुलागे खीर बनाय बर,
        लइका ल मैगी खवावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
          छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

तिहार मं नइये संगी,
            ठेठरी-खुरमी खवइया।
आजकल के बहू भइया,
          नवा-नवा रोटी बनइया।
अइरसा-पोपची भुला के,
      नमकीन-गुजिया बनावत हे।
छत्तीसगढ़ी बियंजन ह,
         छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।

अपन भाषा,अपन बोली,
          बचावव नारा लगावत हे।
जेने ह नरियावत हे,
                 तेने ह मिटावत हे।
छोर के हमर भाषा,
           अंग्रेजी मं गोठियावत हे।
छत्तीसगढ़ी भाषा ह,
          छत्तीसगढ़ मं नदावत हे।.                                

श्री गुरू चालीसा

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श्री गुरू चालीसा
प्रणवउँ प्रथमम् गुरू चरण,
                             बुद्धि ज्ञान गुण खान /
श्री गणेश शारद सहित,
                          बसो हृदय में आन //

अज्ञानी मतिमन्द मैं,
                       हे गुरू स्वामी सुजान /
दोषों से भरा हुआ हूँ मैं,
                           आप हैं कृपा निधान //

                       --:चौपाई:--

जय नारायण जय निखिलेश्वर /
विश्व प्रसिद्ध अखिल तन्त्रेश्वर //
                      यंत्र मंत्र विज्ञान के ज्ञाता /
                      भारत भू के प्रेम प्रणेता //१//

सचिदानंद गुरू के प्यारे /
सिद्धाश्रम से आप पधारे //
                     जब जब होई धरम की हानी /
                     सिद्धाश्रम ने भेजे ज्ञानी //२//

उच्चकोटि के ऋषि मुनि स्वेच्छा /
आये करन धरम की रक्षा //
                     अबकी बार आपकी बारी /
                     त्राहि त्राहि ये धरा पुकारी //३//

मरुधर प्रान्त खरंटिया ग्रामा /
मुलतानचन्द पिता कर नामा //
                     शेषशायी सपनें में आये /
                     माता को दर्शन दिखलाये //४//

जन्म वृतान्त सुनाय नवीना /
मंत्र नारायण नाम का दीना //
                     मात रूपादेवी अति धार्मिक /
                     जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख //५//

नाम नारायण भव भय हारी /
सिद्ध योगी मानव तन धारी //
                      ऋषिवर ब्रह्म तत्व से उर्जित /
                      आत्म स्वरूप गुरू गौरान्वित //६//

एक बार संग सखा भवन में /
कर स्नान लगे चिंतन में //
                     चिन्तन कर समाधि लागी /
                     सुध बुध हीन भय अनुरागी //७//

पूर्ण करी संसार की रीती /
शंकर जैसे बने गृहस्थी //
                    अद्भुत संगम प्रभु माया का /
                    अवलोकन है विधि छाया का //८//

युग युग से भव बंधन रीती /
जहाँ नारायण वहीं भगवती //
                     सांसारिक मन हुई अति ग्लानि /
                     तब हिमगिरी गमन की ठानी //९//

अठरा बरस हिमालय चूमें /
महा तपस्या गुरू पग चूमें //
                     त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन /
                     करम भूमि आये नारायण //१०//

धरा गगन ब्रम्हाण्ड में गूँजी /
सद्गुरुवर की साधना पूँजी //
                     हृदय विशाल शास्त्र भण्डारा /
                     भारत का भौतिक उजियारा //११//

सर्वधर्महित शिविर पुरोधा /
कर्म क्षेत्र के अतुलित योद्धा //
                     प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता /
                     भूत भविष्य के आप विधाता //१२//

एक सौ छप्पन ग्रंथ रचेता /
सिद्धि साधक विश्व विजेता //
                      आयुर्वेद ज्योतिष के सागर /
                      षोडश कला युक्त परमेश्वर //१३//

रतन पारखी विधन हरन्ता /
सन्यासी अनन्यतम सन्ता //
                      अद्भुत चमत्कार दिखलाया /
                      पारद का शिवलिंग बनाया //१४//

वेद पुराण शास्त्र सब गाते /
पारदेश्वर दुर्लभ कहलाते //
                      पूजा कर नित ध्यान लगावे /
                      वो नर सिद्धाश्रम में जावे //१५//

चारिऊ वेद कंठ में धारे /
पूज्यनीय जन जन के प्यारे //
                       गुरुवाणी जब गुरू उचारे /
                       गतिशील ग्रह धरा उतारे //१६//

चिन्तन करत मन्त्र जब गाये /
विश्वामित्र वशिष्ठ बुलाये //
                       मन्त्र नमो नारायण साँचा /
                       ध्यानत भागत भूत पिशाचा //१७//

प्रातः काल करहि निखिलायन /
मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन //
                       निर्मल मन से जो कोई ध्यावे /
                       ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पति पावे //१८//

पाठ करहि जो गुरू चालीसा /
शान्ति प्रदान करहि योगीश //
                       अष्टोदरसत पाठ करत जो /
                       सर्व सिद्धियाँ पाँव पिजत सो //१९//

श्री गुरूचरण कमल की धारा /
सिद्धाश्रम साधक परिवारा //
                        जय जय जय आनन्द के स्वामी /
                        बारम्बार नमामि नमामि //२०//

                    -:दोहा:-

निखिल विनय सादर करें
                            साक्षी सारे देव /
गुरू साधक मन प्राण से
                        बोलो जय गुरूदेव //

"पूज्यनीय गुरूदेव की जय //
वन्दनीय माता जी की जय //"

Sab kuch

मूलाधार चक्र हीलिंग।

  https://youtu.be/APq3mCgb3fM?si=D1nkuyqimWfZXSyp ये वीडियो जरूर देखें, मूलाधार चक्र हीलिंग का है ,रात को सोने से पहले जरूर देखें बहुत पावर...